बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन अनुभाग की ओर से गुरुवार को लाभदायक भैंस पालन हेतु वैज्ञानिकीय प्रबंधन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। नेटवर्क परियोजना एवं कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम एससीएसपी योजना के तहत 26 मार्च तक चलेगा। मुख्य अतिथि तथा संस्थान के संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डा. हरेन्द्र कुमार ने कहा कि दुग्ध उत्पादन में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है।उन्होंने कहा कि कृषि के साथ-साथ हमें पशुपालन जुड़े विषयों को समझना होगा तथा वैज्ञानिक पद्धति को अपनाना होगा तभी हम सफल कृषक या उद्यमी बन सकते हैं। डा. गुप्ता ने बताया कि यद्यपि दुग्ध उत्पादन में हम प्रथम स्थान पर हैं परन्तु प्रति पशु उत्पादन अभी भी कम है। पशुओं का प्रजनन कराने के लिए उत्तम पशु का चयन करना चाहिए। उन्होंने सरकार द्वारा चलायी जा रही किसान क्रेडिट कार्ड एवं अन्य योजनाओं की जानकारी भी दी। विशिष्ट अतिथि एवं प्रभारी पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन अनुभाग डा. ज्ञानेन्द्र कुमार गौढ़ ने कहा कि भारत दुग्ध स्थान में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि पशुओं में हमें आहार व्यवस्था, कुशल प्रबन्धन, पशुओं की बीमारी तथा पशु प्रजनन से सम्बन्धित बातों का ध्यान रखना होगा। प्रसार शिक्षा डॉ. महेश चंद्र ने महिलाओं के पशुपालन व्यवसाय से जुड़ने की सराहना की। कहा कि महिलाएं संगठित होकर डेयरी संचालित कर रही है। जैविक दुग्ध उत्पादन के बढ़ते महत्व के साथ ही जैविक कृषि के लाभ बताए। कार्यक्रम संयोजक एवं भैंस सुधार नेटवर्क परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. एकेएस तोमर ने भैंस की प्रमुख नस्लों मुर्रा जाफराबादी, शुरती आदि से दुग्ध उत्पादन बढ़ने की बात कही। डा. तोमर ने बताया कि सफल भैंस पालन किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे पूर्व पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन अनुभाग के वैज्ञानिक डा. हरिओम पाण्डेय ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत किया। डा. ओम सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर पशुधन उत्पादन एवं प्रबन्धन अनुभाग के प्रभारी डा. ज्ञानेन्द्र गौड़, डा. मुकेश, डा. विश्व बन्धु चतुर्वेदी, डा. विनोद, डा. अनुज चौहान सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।।
बरेली से कपिल यादव
