बरेली। निजीकरण के विरोध मे बरेली ट्रेड यूनियन फेडरेशन की अगुवाई मे कई संगठनों ने बुधवार को यूनियन बैंक की मुख्य शाखा के सामने प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने कहा कि देश की 11 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों में से 10 का एक साथ आना अपने-आप में बड़ी बात है। बीमा कर्मी संघ की गीता शांत ने कहा कि हड़ताल को बदनाम करने के लिए सरकार और कॉरपोरेट मीडिया इसे राजनीतिक कहकर खारिज करना चाहते हैं, लेकिन सवाल यह है क्या अम संहिताओं को बदलना राजनीतिक नहीं है। इंकलाबी मजदूर केंद्र के ध्यान चंद्र मौर्य ने कहा कि चार नई श्रम संहिताएं श्रम सुधार नही बल्कि पूंजी के पक्ष मे श्रम कानूनों की पुनर्सरचना है। इनका उद्देश्य हड़ताल के अधिकार को लगभग निष्प्रभावी करना है। उपाध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने कहा फिक्स टर्म एंप्लॉयमेंट को रोजगार सृजन के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। वास्तव में यह स्थायी रोजगार की समाप्ति और अस्थिर श्रम बाजार की स्थापना है। यह नीति युवा श्रमिकों को आजीवन असुरक्षा, कम मजदूरी और बिना सामाजिक सुरक्षा के जीवन के लिए बाध्य करती है। अधिकारी संघ के ओपी बडेरा और सुनीत भटनागर ने तमाम विभागों में रिक्त पदों को स्थाई रूप से भरने की मांग की। प्रवीण राठौर, अरविंद देव सेवक, केपी सिंह, अनुरोध सक्सेना, अमित कुमार, हरि शंकर कैलाश, फैसल, सुशील कुमार आदि ने भी विचार रखे। सभा की अध्यक्ष मुकेश सक्सेना ने की। महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि गुरुवार को देश के मजदूर, कर्मचारी और किसान अखिल भारतीय आम हड़ताल में उतरने जा रहे हैं।।
बरेली से कपिल यादव
