बरेली। पिछले काफी समय से मढ़ीनाथ पुलिस चौकी समेत उसके आसपास की एक बीघा नजूल की जमीन पर कब्जा है। इस जमीन के काफी हिस्से पर पुराना निर्माण भी है। इस जमीन से कब्जा हटाने के लिए मंगलवार को पुलिस बल के साथ नगर निगम की टीम पहुंची। खबर लिखे जाने तक निर्माण को उठाया नहीं गया था वही एक दुकानदार इसके विरोध में अड़ा हुआ है। मनोज विकट के पिता जगदीश विकट की मौत हो चुकी है। उन्हें मढ़ीनाथ पर एक बीघा जमीन कृषि महाविद्यालय के लिए मिली थी। मगर वहां इसी नाम से प्राइमरी स्कूल का संचालन होता रहा। कालांतर में जमीन दान करने वालों की मौत भी हो गई। जगदीश विकट की मौत के बाद स्कूल का संचालन भी बंद हो गया जबकि यहां बने मकान में जगदीश विकट के परिवार के लोग रहते हैं। इसकी जद में मढ़ीनाथ पुलिस चौकी भी शामिल है। इसके अलावा इसी जमीन पर चार दुकानें भी बनी हुई है। जिसका किराया जगदीश के पुत्र मनोज विकट को मिलता है। मगर उनके पास मालिकाना संबंधी कोई दस्तावेज न होने पर यह भूमि नजूल में दर्ज हो गई। जिस पर अब नगर निगम का कब्जा होना है।
रुपए देकर खरीदी थी दुकान
नजूल की भूमि पर बनी दुकान रुपए देकर उमेश कांत ने खरीदी थी। बीती 5 जून को कब्जा करने गई नगर निगम की टीम ने उस दुकान को सील कर दिया। इसके बाद उमेश कांत सक्सेना की मौत हो गई। उनके परिवार वालों का दावा है कि उमेश कांत सक्सेना की मौत उनका रोजगार छीनने के कारण हुई। मंगलवार को नगर निगम जब इस अवैध निर्माण को ढहाने की तैयारी कर रहा था तो उमेश कांत सक्सेना की पत्नी ममता और पुत्र अमन दुकान को बचाने की मंशा से इसके विरोध पर अड़ गए। दोनों लोग इसे लेकर अनशन पर भी बैठ गए।
बीती पांच जून को दी एक माह की मोहलत
बीती 5 जून को नगर निगम की टीम भारी लाव लश्कर के साथ इस निर्माण को ढहाने पहुंची थी। उस दौरान यहां बनी चार दुकानों को सील कर दिया गया था। मनोज विकट ने कोरोना काल और परिवार की महिला के गर्भवती होने का हवाला देकर मोहलत मांगी थी। जिस पर उन्हें एक साल का समय दिया गया था। इस दौरान मनोज विकट ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया मगर कोई मजबूत दस्तावेज न होने की वजह से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। वहीं उन्होंने नगर निगम पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आईजीआरएस पोर्टल सहित तमाम अफसरों से शिकायत की थी। जिसके बाद नगर आयुक्त अभिषेक आनंद ने इस अवैध कब्जे को हटाने के लिए निर्माण ढहाने की अनुमति डीएम नितीश कुमार से मांगी थी। इसके बाद कब्जे हटाने के लिए 25 अगस्त का दिन निर्धारित हुआ था।
फिर अनशन पर बैठा मनोज विकट
नगर निगम की टीम पहुंचने के बाद विरोध करने के लिए मनोज विकट भी अपने परिवार के साथ अनशन पर बैठ गया जबकि पिछली बार भी उसे एक माह की मोहलत कब्जा हटाने के लिए दी गई थी। इस बार नगर निगम के अफसर मोहलत देने के मूड में नहीं है।।
बरेली से कपिल यादव
