बरेली। एसआईआर के दौरान चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने लॉजिकल एरर के नाम पर करीब तीन लाख मामले पकड़े है। इसमें अधिकतर प्रकरण मे पिता का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा है। ऐसे सभी मतदाताओं के सत्यापन का बीएलओ को निर्देश दिया गया है। एसआईआर के तहत सभी बूथों पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का प्रकाशन किया जा चुका है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची से लिंक न होने वाले 220182 वोटर को नोटिस भेजने की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है। इन वोटर के अतिरिक्त करीब 3 लाख वोटर ऐसे हैं जिनको चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने लॉजिकलएर (तार्किक त्रुटि) के नाम पर पकड़ा है। इन मतदाताओं की वर्ष 2003 की सूची से मैपिंग तो हो गई है अधिकांश ऐसे मतदाता है जिनके लेकिन वह संदेह के दायरे में है। इनमें पिता का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मेल नही खा रहा है। नाम की स्पेलिंग में अंतर है। इस कारण सॉफ्टवेयर ने इसको पकड़ा है। हालांकि ऐसे मतदाताओं को किसी तरीके का नोटिस नही दिया जाएगा। बीएलओ ऐसे मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। सही पाए जाने पर उनका नाम सूची मे बरकरार रहेगा। यदि कही गड़बड़ी पाई जाती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। लॉजिकल एरर में कुछ ऐसे मतदाता भी है जिनके 6 या 6 से अधिक बेटे है। सॉफ्टवेयर ने कुछ ऐसे मामले भी पकड़े है। जिनमें मतदाता और उनके माता-पिता की उम्र में 15 वर्ष से कम का अंतर है। वही बाबा और पौत्र की उम्र मे 50 वर्ष से कम का अंतर होने वाले मामले भी संदेह की श्रेणी में रखे गए है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि लॉजिकल एरर मे करीब तीन लाख मतदाताओं को पकड़ा गया है। इनको कोई नोटिस जारी नही होगा। बीएलओ को उनके सत्यापन का निर्देश दिया गया है।।
बरेली से कपिल यादव
