जिले में फाइलेरिया मरीजों को मिलने लगा दिव्यांगता प्रमाण पत्र

  • मीनापुर और मुशहरी के पांच फाइलेरिया मरीजों को प्रमाण पत्र हुआ निर्गत
  • सभी फाइलेरिया सपोर्ट नेटवर्क मेंबर के सदस्य
  • हाइड्रोसील के ऑपरेशन तेज करने की चल रही कवायद

मुजफ्फरपुर/बिहार- फाइलेरिया रोग के कारण दिव्यांग हुए लोगों में दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत करने की शुरूआत हो चुकी है। इसकी शुरुआत मीनापुर और मुशहरी के पांच फाइलेरिया मरीजों से की गयी है। पहले पांच प्रमाण पत्र पाने वालों में मीनापुर की राजकुमारी देवी, गीता कुमारी, मदन साह और मुशहरी प्रखंड की शीला देवी के साथ अमरजीत कुमार शामिल हैं। इन सभी लोगों में 40 प्रतिशत से अधिक अपंगता पाते हुए दिव्यांगता का प्रमाण पत्र वितरित या पोस्ट के द्वारा भेजा जाएगा। जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने बताया कि फाइलेरिया मरीज में दिव्यांगता का प्रतिशत उसके फाइलेरिया की गंभीरता यानी उनके स्टेज और शरीर के क्रियाकलापों में असुविधा को देख कर दिया जाता है। फाइलेरिया या हांथी पाव में स्टेज 3 के बाद जब पांव या प्रभावित शरीर का अंग ज्यादा सूज जाता है तो उस व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में काफी मुसीबत का सामना करना पड़ता है। फाइलेरिया मरीजों की असमर्थता को देखते हुए ही सरकार ने उन्हें यह सुविधा प्रदान की है। जिले में पहले पांच प्रमाण पत्र पाने वालों में सभी एक फाइलेरिया समूह नेटवर्क मेंबर के सदस्य हैं। इन लोगों ने एमडीए के दौरान भी जागरूकता और दवा खिलाने में काफी सहयोग किया था। अब प्रत्येक मंगलवार को फाइलेरिया मरीजों को प्रमाण पत्र देने का सिलसिला जारी रहेगा। इसके लिए चिकित्सकों की एक टीम भी गठित है जो उनके दिव्यांगता के स्तर की जांच करती है।

हाइड्रोसील के ऑपरेशन को एसकेएमसीएच से जोड़ा जाएगा:

जिले में फाइलेरिया के कारण होने वाले हाइड्रोसील के ऑपरेशन में तेजी लाने के लिए विभाग काफी प्रयासरत है। इसके लिए विभिन्न पीएचसी में सर्जन या संसाधन की कमी होने पर हाइड्रोसील के ऑपरेशन को एसकेएमसीएच में निशुल्क कराया जा सकेगा। केयर के डीपीओ सोमनाथ ओझा ने बताया कि अभी जिले के चार प्रखंडों में हाइड्रोसील ऑपरेशन का सफल संचालन हो रहा है, जिसमें कांटी, मुरौल, सकरा और मोतीपुर शामिल है।

– बिहार से नसीम रब्बानी

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