खेती में ‘लाल सोना’ उगा रहे संभल के किसान

●स्ट्रॉबेरी की मिठास बदलेगी तकदीर

●परंपरागत फसलों से 10 गुना ज्यादा मुनाफा, जिले में 100 हेक्टेयर तक पहुंचा रकबा

सम्भल। गेहूं और धान की लकीर के फकीर बने रहने के दिन अब लद गए हैं। संभल जिले के किसानों के भीतर अब कुछ ‘खास’ करने की अलख जागी है। मिट्टी से सोना उगाने वाले यहां के अन्नदाता अब स्ट्रॉबेरी की खेती के जरिए अपनी तकदीर बदल रहे हैं। स्ट्रॉबेरी विकास योजना के तहत इस साल जिले के 35 किसानों ने इस विदेशी फल की बागवानी का बीड़ा उठाया है। सरकार की ओर से मिले 25 हेक्टेयर के लक्ष्य और किसानों के निजी प्रयासों से जिले में लगभग 100 हेक्टेयर जमीन पर स्ट्रॉबेरी की लाली बिखर रही है।
लागत ज्यादा, पर मुनाफे की गारंटी
जिला उद्यान अधिकारी सौरभ बंसल ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती अन्य पारंपरिक फसलों के मुकाबले महंगी जरूर है, लेकिन इसका मुनाफा किसानों को मालामाल कर देने वाला है। एक हेक्टेयर में लगभग 12 से 13 लाख रुपये की लागत आती है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा लेबर कॉस्ट और पुणे व हिमाचल से आने वाले उच्च गुणवत्ता के पौधों का होता है। हालांकि, दिल्ली की आजादपुर मंडी पास होने के कारण किसानों को बाजार की चिंता नहीं रहती। बेहतर भाव मिलने पर किसान प्रति हेक्टेयर 7 से 8 लाख रुपये तक की शुद्ध आमदनी आसानी से कर लेते हैं।
सब्सिडी का गणित: किसानों को मिल रहा है सरकारी ‘संबल’
उद्यान विभाग और सरकार की ओर से ड्रिप सिंचाई और मलचिंग एवं पौध आदि इनपुट के लिए सब्सिडी दी जा रही है, जो इस महंगी खेती को सुगम बनाती है। लघु एवं सीमांत किसान के लिए 90% तक व सामान्य श्रेणी (2 हेक्टेयर से अधिक) पर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाती है।
किसान की जुबानी: 10 गुना अधिक कमाई
प्रगतिशील किसान कुलदीप ने बताया कि एक एकड़ में पहली बार फसल लगाने पर लागत 6.5 से 7 लाख रुपये आती है, जो दूसरे साल घटकर 6 लाख रह जाती है। कुलदीप के अनुसार, स्ट्रॉबेरी की पहली फसल बाजार में बहुत ऊंची कीमत पर बिकती है; 2 किलो की एक ट्रे 700 से 1200 रुपये तक मिल जाती है। जहां पारंपरिक खेती में अधिकतम आमदनी 70 हजार से 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर सिमट जाती है, वहीं स्ट्रॉबेरी से किसान 5 से 6 लाख रुपये की शुद्ध बचत कर रहे हैं। यह कमाई परंपरागत खेती से 10 गुना ज्यादा है।
महाबलेश्वर से आते हैं पौधे, इन शहरों में है भारी मांग
इस खेती के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पौधे महाबलेश्वर (पुणे) से मंगाए जाते हैं। संभल की स्ट्रॉबेरी की मांग केवल दिल्ली में ही नहीं, बल्कि कोलकाता, जयपुर, चंडीगढ़, मुरादाबाद, लखनऊ, देहरादून और मेरठ जैसे बड़े शहरों में भी है। फसल का चक्र 20 सितंबर से शुरू होकर मार्च तक चलता है, जिसकी तुड़ाई जनवरी से शुरू हो जाती है। इस बार जिले के 75 प्रतिशत नए किसान इस खेती से जुड़े हैं।
प्रशिक्षण से निखरेगी खेती
किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए सरकार एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र और ग्राम चौपाल और किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों विशेषज्ञों और अनुभवी वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को मलचिंग तकनीक और ड्रिप सिंचाई के गुर सिखाए जा रहे हैं।

कैसे करें आवेदन और किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
यदि आप भी इस योजना का लाभ उठाकर स्ट्रॉबेरी या ड्रैगन फ्रूट की खेती करना चाहते हैं, तो प्रक्रिया बेहद सरल है:
कहां करें पंजीकरण:

  • ऑनलाइन पोर्टल: उत्तर प्रदेश उद्यान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट uphorticulture.in पर पंजीकरण करना अनिवार्य है।
  • ऑफलाइन संपर्क: किसान जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय या अपने क्षेत्र के जन सेवा केंद्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
    आवश्यक दस्तावेज:
  • आधार कार्ड की फोटोकॉपी
  • खतौनी (जमीन के कागजात)
  • बैंक पासबुक की कॉपी (सब्सिडी सीधे खाते में भेजने हेतु)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर (जो आधार से लिंक हो)

“संभल के किसानों के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है। हम न केवल उन्हें संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि ट्रेनिंग के जरिए यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनकी फसल उच्च गुणवत्ता की हो ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के दाम मिल सकें।”-सौरभ बंसल, जिला उद्यान अधिकारी, संभल

“अगर सरकार जागरूकता और बढ़ाए तो यह संख्या और बढ़ेगी, जिससे जिले का नाम और लाभ दोनों बढ़ेंगे।”
— कुलदीप, प्रगतिशील किसान

– सम्भल से सैय्यद दानिश

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