बरेली/फतेहगंज पश्चिमी। यूक्रेन मे फंसे कस्बे के आसिफ सकुशल घर लौट आए। घर पहुंचने पर इन छात्र के परिजन लिपट कर खूब रोए और फूल माला पहनाकर उनका भव्य स्वागत भी किया। आसिफ खार्कीव शनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष के छात्र थे। वह कई दिनों से एक बंकर मे रह रहे थे लेकिन दो दिन पहले हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंच गए थे। वहां से भारतीय दूतावास के द्वारा भारतीय प्लेन से शुक्रवार को दिल्ली लाया गया। कस्बा वालों का और घर वालों का छात्र आसिफ का खुशी का ठिकाना नही था। सभी ने भारत सरकार को धन्यवाद कहा। आसिफ की मां हनीफा बेटे के पैरों मे पड़े छाले को देख कर रोने लगी और बेटे को गले लगाकर खुशी के आंसू रोक न सकी। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा मुझे मिल गया है। इससे बड़ी और खुशी क्या होगी। वही आसिफ के पिता जाकिर हुसैन व बेटे रिजवान ने कहा कि बेहद खुशी है कि ऐसी परिस्थिति में बच्चा वापस आ गया। छात्र आशिफ ने बताया कि वहां के हालात बड़े ही भयावह है। हर तरफ मिसाइल व बम के धमाके गूंज रहे थे। लग रहा था कि अब हम अपने देश नही पहुंच पाएंगे। मौका लगते ही हमने स्टेशन की ओर दौड़ लगा दी। स्टेशन पर जिस ट्रेन मे चढ़े हमें नहीं पता था कि ट्रेन किस देश के बॉर्डर पर ले जाएगी। लवीव स्टेशन पर पहुंच कर पता लगा कि हंगरी देश का बॉर्डर नजदीक है। 1300 ग्रेवन डॉलर एक छात्र का बस मे दिया। चौक बॉडर तक पहुंचे। इसके बाद हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट पहुंचे। वहां से ट्रेन मे बैठकर अट्ठारह सौ किलोमीटर तक ही खड़े होकर सफर तय करना पड़ा। वहां से भारतीय दूतावास के सहयोग से दिल्ली भेजा गया। दिल्ली से शुक्रवार को एक बजे अपने घर पहुंचे और भारत सरकार को सलाम कर शुक्रिया अदा किया।।
बरेली से कपिल यादव
