वक़्फ़ संपत्तियों का पंजीकरण और मतदाता सूची में नाम जोड़ना एक मिल्ली फ़र्ज़…

निर्धारित समय में वक़्फ़ संपत्तियों का नवीनीकरण न कराने पर मुतवल्ली को हो सकती है जेल

देवबंद:
इंडिया इस्लामिक एकेडमी देवबंद के संस्थापक एवं निदेशक मौलाना मेहदी हसन एैनी क़ासमी ने आज एक प्रेस बयान में कहा कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने भले ही वक़्फ़ एक्ट 2024 की कुछ धाराओं पर अंतरिम राहत (Interim Relief) दी है, लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि “उम्मीद पोर्टल” पर वक़्फ़ संपत्तियों के पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया बिना रुके जारी रहेगी।
मौलाना मेहदी हसन एैनी क़ासमी ने सभी वक़्फ़ मुतवल्लियों और कस्टोडियनों से अपील की कि वे 5 दिसम्बर 2025 से पहले अपनी वक़्फ़ संपत्तियों का नवीनीकरण (Renewal) अनिवार्य रूप से पूरा कर लें।
उन्होंने चेतावनी दी कि —
“जो मुतवल्ली निर्धारित समय सीमा के भीतर वक़्फ़ संपत्तियों का नवीनीकरण नहीं कराएंगे, उन पर 20 हज़ार से एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और छह माह की कैद भी हो सकती है।”
उन्होंने जानकारी दी कि देवबंद और आसपास के क्षेत्रों की वक़्फ़ संपत्तियों के पंजीकरण हेतु मस्जिद हकीमुल इस्लाम, ग्रीन सिटी, देवबंद में एक विशेष बूथ स्थापित किया गया है, जहाँ प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है।
पंजीकरण के लिए सुन्नी वक़्फ़ सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड द्वारा नियुक्त कोऑर्डिनेटर मौलाना क़ारी रहीमुद्दीन क़ासमी से सीधा संपर्क किया जा सकता है।
📞 संपर्क नंबर: +91 80771 03042

मौलाना ने बताया कि तंजीम अबना ए मदारिस देवबंद और जामिया हकीमुल इस्लाम देवबंद के सहयोग से अब तक ज़िला सहारनपुर, देवबंद और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों वक़्फ़ संपत्तियों और मस्जिदों के मुतवल्लियों का मार्गदर्शन किया जा चुका है।
साथ ही, क़ारी रहीमुद्दीन क़ासमी और उनकी टीम बड़ी संख्या में उम्मीद पोर्टल पर दस्तावेज़ अपलोड करने का कार्य कर रही है।

क़ारी रहीमुद्दीन क़ासमी ने कहा —
“हम सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार वक़्फ़ बोर्ड में पंजीकृत संपत्तियों के नवीनीकरण और पंजीकरण का कार्य पूरी गंभीरता से कर रहे हैं, लेकिन अब भी गाँवों और दूरदराज़ क्षेत्रों में कई मुतवल्ली सजग नहीं हैं। इस मामले में ज़रा-सी लापरवाही भी भविष्य में गंभीर परिणाम दे सकती है।”
इसके साथ ही, मौलाना मेहदी हसन एैनी क़ासमी ने भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) द्वारा चलाई जा रही Special Intensive Revision (SIR) मुहिम की अहमियत पर भी ज़ोर दिया।
उन्होंने कहा कि —
“मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना सिर्फ़ एक अधिकार नहीं बल्कि एक कौमी और सामाजिक ज़िम्मेदारी है, जिससे हमारी मिल्ली और राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व मज़बूत होता है।”
उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनता से अपील की कि वे अपने, अपने परिवार और पड़ोसियों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने का विशेष ध्यान रखें।
यदि 2003 की वोटर लिस्ट में नाम खोजने या फ़ॉर्म भरने में किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो, तो तंजीम अबना ए मदारिस हर संभव सहयोग के लिए हर समय तैयार है।

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