बरेली। खरमास के कारण देव गुरु बृहस्पति एक अप्रैल से तीन मई तक अस्त रहेंगे। शास्त्रों के अनुसार शादी के लिए बृहस्पति का उदय होना बेहद आवश्यक है क्योंकि इन्हें वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है। छह मई से पुन: विवाह मुहूर्त आरंभ होंगे। 15 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास होने के कारण मांगलिक कार्यों विवाह, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नव प्रतिष्ठान, वधू प्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार, देव प्रतिमा प्रतिष्ठा आदि के कार्यों पर विराम लग जाएगा। हालांकि धार्मिक कार्य विधि-विधान से संपन्न होंगे।ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धनु एवं मीन राशि में सूर्य के प्रवेश करने से खरमास लगता है। जिसकी अवधि एक माह तक रहती है। उन्होंने बताया कि 15 मार्च को सुबह 06:34 मिनट पर भगवान सूर्य कुंभ से मीन राशि मे प्रवेश करेंगे, जो कि 14 अप्रैल तक दोपहर 2:52 मिनट तक रहेंगे। प्रात: 7:34 मिनट तक ज्येष्ठा नक्षत्र एवं दोपहर 12:52 बजे तक सिद्धियोग रहेगा। मीन राशि में सूर्य के प्रवेश से मीन संक्रांति का पुण्यकाल सूर्योदय से दोपहर 12:58 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार शादी के लिए बृहस्पति का उदय होना बेहद आवश्यक है, क्योंकि इन्हें वैवाहिक जीवन का कारक माना जाता है। छह मई से पुन: विवाह मुहूर्त आरंभ होंगे। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक खरमास मे दान-पुण्य, तीर्थ स्नान और मंत्र करने की परंपरा है। 15 मार्च को मीन संक्रांति होने से इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा जरूर करें। सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य देव तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। इसके लिए लोटे में जल के साथ लाल फूल, चावल भी डाल लेना चाहिए। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो ज्योतिष में इसे संक्रांति या संक्रमण कहा जाता है। 15 मार्च सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेगा तो इस दिन मीन संक्रांति मनाई जाएगी। संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। स्नान के बाद दान-पुण्य करना चाहिए।।
बरेली से कपिल यादव
