बरेली। कोरोना के समय की 15 फीसदी फीस समायोजन, शुल्क अधिनियम 2018 का उल्लंघन और शिक्षा संबंधी महत्वपूर्ण विषयों के संबंध में अभिभावक संघ ने डीएम के लिए ज्ञापन दिया। अध्यक्ष अंकुर सक्सेना ने कहा कि सत्र 2020-21 की सभी स्कूलों को 15 फीसदी फीस समायोजित करनी थी, लेकिन कई स्कूलों ने ऐसा नहीं किया है। अभिभावकों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश शुल्क अधिनियम 2018 के अंतर्गत गठित जिला समिति के जिलाधिकारी अध्यक्ष हैं। इसकी बैठक बुलाकर ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाए। संघ ने विद्यालयों के तीन वर्षों की फीस व अन्य विवरण वेबसाइट पर अपलोड न करने की भी शिकायत की। कक्षा पांच और कक्षा आठ के कमजोर छात्रों को जबरन स्कूल छोड़ने का दबाव बनाने और अंतिम तिमाही की फीस जमा न होने पर रिजल्ट रोकने का आरोप लगाया। संघ का कहना है कि कई स्कूलों के शिक्षक निजी कोचिंग चला रहे हैं। कोचिंग न पढ़ने वाले छात्रों को फेल होने की धमकी दी जाती है। ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई की मांग की।।
बरेली से कपिल यादव