‘हिन्दू विवाह अधिनियम’ पर व्यापक टीका ग्रंथ का हुआ लोकार्पण
न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने किया विमोचन, विधि-जगत ने सराहा प्रयास
बरेली। बरेली बार एसोसिएशन के सभागार में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राजत बिंदल द्वारा लिखित “हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 — एक व्यापक टीका” ग्रंथ का लोकार्पण न्यायमूर्ति श्री आलोक माथुर (इलाहाबाद उच्च न्यायालय) के कर-कमलों से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी एवं अधिवक्तागण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन के साथ प्रारम्भ हुए समारोह में अध्यक्ष श्री मनोज हरित ने इसे बरेली के विधि-परिदृश्य में मील का पत्थर बताया। लेखक श्री बिंदल ने कहा कि यह ग्रंथ उनके 34 वर्षों के अनुभव का सार है, जिसमें हिन्दू विवाह अधिनियम के साथ परिवार न्यायालय अधिनियम, भरण-पोषण एवं अन्य संबंधित कानूनों को समाहित किया गया है। उन्होंने वर्चुअल सुनवाई का अधिकार, साक्ष्य की अनिवार्य वीडियो रिकॉर्डिंग तथा “विवाह के अपूरणीय विखंडन” को तलाक का आधार बनाने जैसे सुझाव भी रखे।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने इसे केवल टीका नहीं, बल्कि विधि-समुदाय के लिए उपयोगी न्यायिक उपकरण बताया और युवा अधिवक्ताओं को अद्यतन विधि-ज्ञान के साथ कार्य करने का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं संवाद सत्र के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि का परिचय सुश्री गार्गी बिंदल, अधिवक्ता द्वारा कराया गया। स्मृति चिह्न प्रदान श्री राजत बिंदल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री मनोज हरित ने किया। कार्यक्रम का समापन हाई टी एवं नेटवर्किंग के साथ हुआ जिसमें उपस्थित अधिवक्ताओं ने पुस्तक की विषय-वस्तु पर परस्पर विचार-विमर्श किया।
