बाड़मेर /राजस्थान- राज्य सूचना आयोग ने ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग को निर्देश दिया है कि वो पंचायती राज संस्थाओं में लोक उपयोग की जरुरी सूचनाओं के प्रकटीकरण की पुख्ता व्यवस्थाएँ करे। आयोग ने विभाग से कहा है कि अपने सभी कार्मिको और पंचायत प्रतिनिधियों को सूचनाओं के अधिकार कानून में मिलने वालें आवेदनों को समयपरक निस्तारण के लिए मुस्तैद करे। आयोग ने इसके लिए तीन माह का समय दिया है।
आयोग ने यह आदेश तब दिया जब उदयपुर के शांतिलाल मेहता ने जिला परिषद के विरुद्ध अपील दाखिल कर शिकायत की कि उन्होंने जिला परिषद से सूचना अधिकार कानून के तहत आवश्यक सूचनाओं के प्रकाशन और प्रकटीकरण की जानकारी मांगी थी । मगर परिषद के अधिकारियों ने उनकी सुनवाई नहीं की। इस मामले की सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त नारायण बारेठ ने कहा कानून लागू करने के साथ ही यह अपेक्षा की गई थी कि सरकारी विभाग और संस्थान अधिक से अधिक सूचनाओं का खुद ब खुद प्रकटीकरण करेंगे। लेकिन इस दिशा में समुचित कदम नहीं उठाये गए है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि यह उचित समय है जब पंचायती राज महकमे के प्रमुख शासन सचिव को निर्देश दिया जाये कि वे जरुरी सूचनाओं का इस तरह सार्वजनिक प्रकाशन करे कि वे आम अवाम को सहजता से उपलब्ध हो।आयोग ने विभाग से कहा है कि वो सूचना अधिकार कानून की धारा 4 में वर्णित प्रावधान के क्रियान्वयन की व्यवस्थाएँ करे।
आयोग ने सुनवाई के दौरान कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि लोक सूचना अधिकारी कानून की पालना को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसे अनेक मामले आयोग के सामने आये है जब आवेदक को न तो सूचनाएं मुहैया करवाई गई और न ही कोई जवाब दिया गया। आयोग में सुनवाई के दौरान भी न तो समय पर जवाब दिया जाता है न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी हाजिर होता है। आयोग ने कहा यह दुखद है कि प्रथम अपील के प्रावधान को ही भुला दिया गया है। ऐसे में एक नागरिक के सम्मुख दूसरी अपील करने के लिए आयोग का रुख करने के अलावा ओर कोई चारा नहीं रह जाता है।
सूचना आयुक्त बारेठ ने सुनवाई के दौरान कहा ऐसी सूरत में आयोग मूकदर्शक नहीं रह सकता। यह विडंबना है कि पंचायत प्रतिनिधि प्रथम अपील की सुनवाई में बेरुखी का भाव रखते है। जब कोई नागरिक किसी सूचना का तकाजा करे और वो किसी अभिलेख में बंद हो कर रह जाये तो लोगो के दिलो दिमाग में संदेह की दीवारे खड़ी होने लगती है और स्थानीय स्तर पर विवाद उतपन्न होने लगते है। यही वजह है कि समाज में अब जवाबदेही कानून के लिए आवाज उठने लगी है।
सूचना आयोग ने अपने आदेश में कई न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया है और कहा है कि सूचना का अधिकार आम आदमी के हाथो एक ऐसा उपकरण है जो सरकार के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। साथ ही भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मदद करता है। आयोग ने कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी एक ऐसी प्राणवायु है जिसका निर्बाध प्रवाह लोकतंत्र को मजबूत और कारगर बनाता है। आयोग ने कहा सूचना कानून की पालना में कोताही एक नागरिक को सूचना हासिल करने के अधिकार से महरूम करना है।
सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त बारेठ ने कहा राज्य की अस्सी प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है। अगर जिला प्रशासन की जवाबदेही है तो पंचायती राज प्रतिनिधियों का भी फर्ज है कि वे इस कानून के कामयाब क्रियान्वयन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करे। आयोग ने कहा कि दुनिया के उन हिस्सों में जहां सूचना का उपलब्धता सरल और सहज है ,जीवन बेहतर हुआ और समावेशी विकास को गति मिली है।
– राजस्थान से राजूचारण
