विश्व पटल पर ऐतिहासिक धरोहरों को संजोय रखना हमारी पहली प्राथमिकता : स्वरूप सिंह खारा

राजस्थान/बाड़मेर- भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा के अथक प्रयासों से शिव विधानसभा क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल के तहत राजस्थान का खजुराहो कहने वाला और बाहरवीं शताब्दी में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण को झेलने के बावजूद अपने अतीत की विरासत को संजोने वाले स्वर्णिम इतिहास के नाम से प्रसिद्ध “किराडू” नाम से मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने सरकारी दस्तावेजों में राजस्व गाँव स्थापित किया गया है। इस निर्णय से किराड़ू गाँव में पर्यटन को पंख लगेंगे , स्थानीय निवासियों को राजस्व और प्रशासनिक कार्यों में बड़ी सुविधा मिलेगी और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

भाजपा नेता स्वरूपसिंह खारा ने इस कार्य के लिए लंबे समय से प्रयास किए। उनकी मेहनत रंग लाई और प्रशासनिक समन्वय के चलते यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हो सकी। इस फैसले से क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है और ग्रामीणों ने स्वरूप सिंह का आभार व्यक्त किया है।

पिछले साल ही भाजपा नेता स्वरूपसिंह खारा ने किराडू में “किराडू दीपोत्सव” कार्यक्रम का आयोजन करवाया था और किराड़ू मन्दिर के पुनरुद्धार,संरक्षण,विकास व पर्यटन केंद्र विकसित करने की जिला प्रशासन और केन्द्र और राज्य सरकार से माँग भी उठाई थी।

राजस्व गाँव बनने से यहां के निवासियों को मूलभूत समस्याओं का समाधान करने के साथ ही कई आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। भाजपा की सरकार “सबका साथ, सबका विकास” के मूलमंत्र को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दे रही है।

स्थानीय नागरिकों और किसानों ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि स्वरूप सिंह की प्रतिबद्धता और भाजपा सरकार की नीतियों की वजह से यह संभव हो सका।

राजस्थान सरकार द्वारा लिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय क्षेत्र की प्रगति और गौरवशाली इतिहास को पुनः जीवंत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही विधानसभा क्षेत्र में कई और नवीन राजस्व गांव स्वीकृत किए गए हैं।

इतिहास के झरोखे से किराड़ू… राजस्थान का एक मंदिर प्राचीन समय से ही बहुत रहस्यमयी रहा है। बाड़मेर जिले में स्थित इस मंदिर का नाम है किराडू मंदिर। पूरे राजस्थान में खजुराहो मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर प्रेमियों को विशेष आकर्षित करता हैं, लेकिन यहां की ऐसी भयानक सच्चाई है जिसे जानने के बाद कोई भी यहां शाम के बाद ठहरने की हिम्मत नहीं कर सकता। दरअसल मान्यता है कि जो भी इस मंदिर में शाम ढ़लने के बाद रूक जाता है। वह पत्थर का बन जाता है। किराडू में मुख्य रूप से पाच मंदिर है, जो कि लगभग 900 साल पुराने माने जाते हैं।

मान्यता के पीछे कारण इस मान्यता के पीछे एक अनोखी कहानी है। कहा जाता है कि कभी किराडू के आसपास लोग रहा करते थे। यहां बस्ती थी। इस जगह को विरान एक शाप ने बनाया। सालों पहले किराडू में एक तपस्वी पधारे। उनके साथ शिष्यों की एक टोली थी। तपस्वी एक दिन शिष्यों को गांव में छोड़कर देश भ्रमण पर चले गए। इस बीच शिष्यों का स्वास्थ्य खराब हो गया। गांव वालों ने उनकी कोई मदद नहीं की।

तपस्वी जब वापस किराडू लौटे और अपने शिष्यों की दुर्दशा देखी तो गांव वालों को शाप दे दिया कि जहां के लोगों के दिल पत्थर के हैं वह इंसान बने रहने योग्य नहीं हैं। इसलिए सब पत्थर के हो जाएं। गांव में सिर्फ एक औरत थी। जिसने उनके शिष्यों की सहायता की थी। तपस्वी ने उस पर दया करते हुए कहा तुम गांव से चली जाओ वरना तुम भी पत्थर की बन जाओगी, लेकिन याद रखना जाते समय पीछे मुड़कर मत देखना। वह औरत गांव से चली गई, लेकिन उसके मन में यह संदेह होने लगा कि तपस्वी की बात सच भी है या नहीं वह पीछे मुड़कर देखने लगी और वह भी पत्थर की बन गई।

धोरों के गढ़ बाड़मेर में किराड़ू का मंदिर और जगत (उदयपुर) का अंबिका मंदिर और नीलकंठ महादेव मंदिर। किराड़ू को राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है, जबकि जगत लघु खजुराहो के रूप में जाना जाता है। दक्षिण भारतीय शैली में बना किराड़ू का मंदिर अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। बाड़मेर से 43 किलोमीटर दूर हात्मा गांव में ये मंदिर है। खंडहरनुमा जर्जर से दिखते पांच मंदिरों की श्रृंखला की कलात्मक बनावट देखने वालों को मोहित कर लेती हैं। कहा जाता है कि 1161 ईसा पूर्व इस स्थान का नाम ‘किराट कूप’ था। करीब 1000 ई. में यहां पर पांच मंदिरों का निर्माण कराया गया। लेकिन इन मंदिरों का निर्माण किसने कराया, इसके बारे में कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन मंदिरों की बनावट शैली देखकर लोग अनुमान लगाते है कि इनका निर्माण दक्षिण के गुर्जर-प्रतिहार वंश, संगम वंश या फिर गुप्त वंश ने किया होगा। मंदिरों की इस शृंखला में केवल विष्णु मंदिर और शिव मंदिर (सोमेश्वर मंदिर) थोड़े ठीक हालात में है। बाकि मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। श्रृंखला में सबसे बड़ा मंदिर शिव को समर्पित नजर आता है। खम्भों के सहारे निर्मित यह मंदिर भीतर से दक्षिण के मीनाक्षी मंदिर की याद दिलाता है, तो इसका बाहरी आवरण खजुराहो का रंग लिए हैं। काले व नीले पत्थर पर हाथी-घोड़े व अन्य आकृतियों की नक्काशी मंदिर की कलात्मक भव्यता को दर्शाती है। श्रृंखला का दूसरा मंदिर पहले से आकार में छोटा है। लेकिन यहां शिव की नहीं विष्णु की प्रधानता है। जो स्थापत्य और कलात्मक दृष्टि से काफी समृद्ध है। शेष मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। लेकिन बिखरा स्थापत्य अपनी मौजूदगी का एहसास कराता है। किराड़ू के इन मंदिरों को देखने के बाद ये सवाल उठता है कि आखिर इन्हें खजुराहो की तरह लोकप्रियता क्यों नहीं मिली। साथ ही इन्हें सहेजने के प्रयास क्यों नहीं किए गए पूर्व सरकार के द्वारा ये बहुत ही दुखदायी बात है।

– शाहजहांपुर से राजूचारण

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