बरेली। जनपद के इज्जतनगर स्थित डीआरएम कार्यालय में शुक्रवार रात रेलकर्मी ताराचंद के परिजन उसका शव लेकर पहुंचे और अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग करने लगे। परिजनों का कहना था कि फतेहगढ़ में तैनात एक सीनियर सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) के लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना के कारण ताराचंद को ब्रेन हेमरेज हुआ, जिससे उनकी मौत हो गई। संजयनगर के पास गोपालनगर निवासी 50 वर्षीय तारा चंद रेलवे के सिग्नल एंड टेलीकॉम (एसएंडटी) विभाग में लोहार पद पर कार्यरत थे और उनकी तैनाती फतेहगढ़ में थी। ताराचंद के भतीजे भोला और पत्नी सावित्री का कहना है कि एसएसई द्वारा उनका तीन बार तबादला किया गया और लगातार दबाव बनाकर ड्यूटी कराई जाती रही। परिजनों का आरोप है कि 25 जनवरी को अवकाश के दिन भी उन्हें रात की ड्यूटी पर बुलाया गया। स्वास्थ्य खराब होने की जानकारी देने पर चार्जशीट की धमकी दी गई। ड्यूटी के दौरान ही ताराचंद बेहोश होकर गिर पड़े। उन्हें पहले फतेहगढ़, फिर कन्नौज और बाद मे कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने ब्रेन हेमरेज की पुष्टि की। इलाज के दौरान शुक्रवार सुबह उनकी मौत हो गई। मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई के आश्वासन पर शांत हुए परिजन परिवार का यह भी आरोप है कि घटना के बाद उन्हें कागजों में अनुपस्थित दर्शाया गया हालांकि शिकायत के बाद ऑन ड्यूटी दिखाया गया। कार्रवाई न होने से आक्रोशित परिजन शाम को शव लेकर डीआरएम कार्यालय पहुंचे और बाहर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद रेलवे अधिकारियों ने परिजनों को समझाया और मामले की जांच व आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शांत हुए। घटना की सूचना पर मेंस कांग्रेस के मंडल मंत्री रजनीश तिवारी, अनिल शर्मा समेत तमाम पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और परिवार को समर्थन दिया। यूनियन ने संबंधित एसएसई के खिलाफ विभागीय जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।।
बरेली से कपिल यादव
