बाड़मेर /राजस्थान- आजकल हमारे क्षेत्रीय पत्रकारिता और गाव ग्वाड, तहसील और छोटे मोटे कस्बो मे पत्रकारिता करने का शौक रखने वाले के बारे मे यह कहना तनिक भी अतिशयोक्ति नही होगा कि बेरोजगारी मे बेगारी करने की लालसा से लबरेज है, क्षेत्रीय पत्रकारिता मे गांव कस्बे मे बतौर रिपोर्टर का काम करने वाले एक दो किसी मिडिया घराने को छोड दिया जाए तो शायद ही अपने रिपोर्टर को कोई मिडिया हाऊस वेतन, मानधन , यात्रा भत्ता, देता हो उल्ट आईकार्ड, माईक, आइ डी ,स्टीकर्स के नाम पर हजार दो हजार रुपये रिपोर्टर से ही और ले लिया जाता है ।
नवनियुक्त रिपोर्टर को सालाना विज्ञापन के लिए टारगेट दिया जाता है, आज के दौर मे विज्ञापन मिलना इतना आसान नही होता है और अगर मिल भी गया तो विज्ञापन का पैसा मिलना बहुत मुश्किल, यह सभी बाते रिपोर्टर को हमेशा तनाव मे रखती है क्योंकि आफिस से विज्ञापन के पैसे का लगातार दबाव बना रहता है, एक विज्ञापन का पैसा मिला नही की कोई दूसरा तीज त्योहार आ गया फिर विज्ञापन के लिए दबाव यह सतत चलते रहता है और पत्रकार बेचारा बगैर तनख्वाह के नौ मन टेन्शन लेकर घूमते रहता है। कभी-कभी यह देखा गया है पत्रकारिता का शौक रखने वाले कुछ आर्थिक रुप से मजबूत पत्रकार अपनी पोजीशन बनाए रखने के लिए विज्ञापनों का पैसा अपने जेब से दे देते है l
क्षेत्रीय पत्रकार को कोई भी संस्था किसी प्रकार का कोई भी मानदेय यात्रा भत्ता इत्यादि का भुगतान नहीं करती उनके कमाई का स्त्रोत मात्र विज्ञापनों पर ही निर्भर होता है वैसे ज्यादातर लोग सरकारी विभागों या फिर पुलिस तत्र में सेटिंग वेटिंग के तौर तरिके पर अच्छी कमाई कर लेते हैं l
मैं ऐसा कुछ लोगों को जानता हूं जो क्षेत्रीय पत्रकार हैं और जिले के पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों से ज्यादा बिजनेस करते हैं हर आदमी के कार्य करने का तरीका जरूर अलग अलग होता है कुछ लोगों ने स्थानीय स्तर पर अपनी इतनी अच्छी पैठ बना रखी है कि उन्हें तीज त्यौहार आने पर केवल एक बार फोन करने की आवश्यकता होती है।
विज्ञापन कितने का लगाना है यह उनका अपना निर्णय होता है क्योंकि सामने वाले से उनकी ट्यूनिंग इतनी अच्छी है कि वह सब जानते हैं हमारा एक क्षेत्रीय पत्रकार है। राशन लेने गया राशन डीलर सभी को एक-एक किलो राशन कम दे रहा था उसने दिमाग लगाया और खड़े होकर सबको पूरा राशन दिलवाया शाम को राशन डीलर उसके घर आकर बोला पत्रकार सर आप राशन लेने ना आया करो हम खुद ही पहुंचा दिया करेंगे और साल में तीन चार बार जो भी छोटा बड़ा सा विज्ञापन हो निकाल दिया करो हम से अपने हिसाब से विज्ञापन का पैसा ले लिया करो मुझे लगता है क्षेत्रीय स्तर पर सबसे अच्छा छोटे दुकानों पर ही बड़ा विज्ञापन निकालता है और जाहिर सी बात है यह अच्छा विज्ञापन निकलेगा तो उसे भी अच्छा अनुदान समयानुसार मिलेगा।
– राजस्थान से राजूचारण
