फरीदपुर, बरेली। चालक और हेल्पर की मौत के बाद मामले की जांच मे जुटी पुलिस ने टैंकर के केबिन की तलाशी ली तो उसमे चार बोतले बरामद हुई। इनमें एक-एक लीटर की दो बोतलों में एक खाली थी। उसमें से मेथेनॉल की गंध आ रही थी। एक अन्य बोतल मेथेनॉल से आधी भरी हुई मिली। वही 250-250 मिली की कोल्डड्रिंक की दो खाली बोतलें भी मिली। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि दोनों ने कोल्डड्रिंक में मिलाकर मेथनॉल पीया होगा। ड्राइवर सुरेंद्र और हेल्पर पुष्पेंद्र की मौत के बाद फॉरेंसिक टीम ने टैंकर के केबिन की बारीकी से जांच की। पुलिस का मानना है कि ड्राइवर और हेल्पर ने खाना खाने से पहले टैंकर से मेथेनॉल निकालकर उसका सेवन किया। इसके बाद खाना खाते-खाते दोनों बेहोश हो गए। मगर ज्यादा मात्रा में मेथेनॉल के सेवन से दोनों बेहोश हो गए और अस्पताल पहुंचने तक मौत हो गई। यही वजह रही कि उनका खाना भी टैंकर के केबिन मे बिखरा हुआ मिला। पुलिस और आबकारी विभाग की टीम मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच में जुटी हुई है। आबकारी विभाग की टीम ने टैंकर की जांच की तो उसके आउटलेट पर सील लगी मिली। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब मेथेनॉल टैंकर से नही निकाला गया तो कहां से आया। यह भी आशंका जताई जा रही है कि जहां से मेथेनॉल टैंकर भरा गया वहीं से चोरी छिपे लाया गया हो और ड्राइवर व हेल्पर रास्ते में इसका सेवन करते हुए आ रहे हो। पुलिस और आबकारी विभाग की टीम ने असम से पूरे रिकॉर्ड तलब किए हैं, जहां से यह टैंकर मेथेनॉल लेकर आया था। मेथेनॉल अल्कोहल होता है लेकिन अत्यन्त विषैला और पीने के लिये अनुपयुक्त होता है। इसके पीने से मनुष्य मर सकता है। इसका उपयोग एन्टीफ्रीज, ईंधन आदि के रूप में उद्योगों में होता है। यह एथेनॉल के विकृतिकारक के रूप में भी प्रयुक्त होता है। मृत ड्राइवर और हेल्पर का शव का पोस्टमार्टम कराया गया तो मौत का कारण स्पष्ट नही हो सका। दोनों के पेट से पंजेंट स्मेल महसूस (कीचड़ जैसी तीव्र दुर्गंध) की गई। इसके चलते बिसरा प्रिजर्व किया गया है। पुलिस का कहना है कि मेथेनॉल पीने पर भी पंजेंट स्मेल आती है। मगर बिसरा की फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत का सटीक कारण सामने आ सकेगा।।
बरेली से कपिल यादव
