बरेली। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गुरुवार को जिले भर मे चाइनीज और खतरनाक मांझे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। अभियान के तहत पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से अलग-अलग क्षेत्रों में सघन जांच की। साथ ही मांझा निर्माण में प्रयुक्त होन वाले केमिकल के सैंपल लिए। एक साथ जिले के सभी थाना क्षेत्रों में टीमें उतारी गई। जिससे अवैध रूप से मांझा बनाने और बेचने वालों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने मांझा निर्माण, भंडारण और बिक्री को लेकर जगह-जगह चेकिंग अभियान चलाया। अभियान के दौरान उन ठिकानों पर भी छापेमारी की गई। जहां खतरनाक मांझा तैयार किए जाने की आशंका थी। बाकरगंज मे एडीएम सिटी और एसपी सिटी ने चेकिंग कर मांझे को धारदार बनाने के लिए उपयोग किए जा रहे रसायनों के नमूने भरे। जिन्हें परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि चाइनीज मांझा न केवल कानूनन प्रतिबंधित है, बल्कि यह मानव जीवन, पशु-पक्षियों और बिजली आपूर्ति के लिए भी गंभीर खतरा बनता है। ऐसे मे इसका निर्माण और बिक्री, दोनों ही अपराध है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बरेली मे खतरनाक मांझा के खिलाफ 15 जनवरी से अभियान चल रहा है। अब तक शीशगढ़, प्रेमनगर, किला, फरीदपुर, हाफिजगंज और कोतवाली में 8 मुकदमे दर्ज कर 13 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनके कब्जे से 85 चरखी चाइनीज व खतरनाक मांझा बरामद कर जब्त किया गया है। मांझा फैक्ट्री मे विस्फोट से तीन व्यक्तियों की हुई थी मौत: किला के बाकरगंज इलाके मे स्थित मांझा फैक्ट्री मे 7 फरवरी 2025 को हुए विस्फोट मे तीन लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में फैक्ट्री मालिक अतीक रजा खान, मजदूर फैजान और सरताज शामिल थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि फैक्ट्री मे गंधक, पोटाश और कांच के मिश्रण को मांझे को धार देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। जिसके चलते यह विस्फोट हुआ। शहर के पुलों पर आए दिन होते मांझे से हादसे: शहर के पुलों पर मांझा से होने वाले हादसों से बचाव के कोई इंतजाम नही है। अक्सर यहां से गुजरने वाले दो पहिया वाहन चालकों के गले में मांझा फंसता है और वे घायल हो जाते हैं। हालांकि बरेली मे इस तरह कोई मौत नही हुई है लेकिन घायलों की अच्छी खासी संख्या है।।
बरेली से कपिल यादव
