गुब्बारे बेचकर परिवार का सहयोग करता है नन्हा सुल्तान

मुजफ्फरनगर/भोपा। पढ़ने लिखने की उम्र में नन्हा सुल्तान गुब्बारे बेचकर परिवार के भरण पोषण में आर्थिक सहयोग करता है। सुबह से लेकर देर शाम तक उसे सड़कों पर गुब्बारे बेचते देखा जा सकता है। जब पढ़ने लिखने की उम्र में बच्चे किताबें,कापी व कलम उठाते हैं उसमें वह गुब्बारे बेचकर परिवार का आर्थिक बोझ उठा रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति व गरीबी ने नन्हे सुल्तान से शायद उसका बचपन छीन लिया है।उसे तो बाल्यावस्था में ही यह भी नहीं मालूम कि स्कूल की सीढ़ियों पर भी कभी उसे चढ़ना है।
कस्बा भोपा के समाजसेवी व व्यापारी विकास कर्णवाल ने बताया कि एक मासूम सा बच्चा अक्सर उसके पास आता है और कहता है कि अंकल एक गुब्बारा ले लो, कभी कहता है दो गुब्बारे ले लो। इससे उसके गरीबी से जूझते परिवार को कुछ आर्थिक सहयोग मिल सकता है। सुबह से शाम तक सड़कों पर घूम घूम कर नन्ना सुल्तान नाम का यह बच्चा गुब्बारे ले लो, गुब्बारे ले लो की आवाज गुनगुनाता रहता है। कभी उसके गुब्बारे पूरे बिक जाते हैं लेकिन कभी-कभी वह गुब्बारों को लेकर वापस निराश छोटे छोटे कदमों से घर की ओर वापस लौट जाता है। उन्होंने बताया कि मैं जब भी उसके पास से गुजरता हूं। वह गुब्बारे देने कि मुझसे जिद करने लगता है मैं कभी गुब्बारों की ओर देखता हूं तो कभी उस मासूम बालक के चेहरे को। जिस अवस्था में बच्चे स्कूलों में किताब कापियां व कलम उठाते हैं,उस अवस्था में व वह परिवार का बोझ उठाने को मजबूर है। गरीबी न जाने उसे किस मोड़ पर ले जा रही है। उसे उन रास्तों से लौटने की राह भी नहीं मालूम जिन राहों पर वह बाल अवस्था में ही जा रहा है।उसकी सारी दिनचर्या गुब्बारों के चारों तरफ ही सिमटकर रह गई है। शिक्षा के लिए दरवाजे उसके लिए शायद बंद हो चुके हैं। उसे यह भी कोई बताने वाला नहीं है कि इस अवस्था में पढ़ाई लिखाई करने से जीवन को खुशनुमा वातावरण में डाला जा सकता। वह तो बस गुब्बारे बेचने में ही सुबह से शाम तक लगा रहता है। शायद गरीबी ने उसके सपनों को चकनाचूर करके रख दिया है। पथरीले रास्तों, उबड़ खाबड़ सड़कों पर नंगे पैर चलता वह नन्हा बालक सुल्तान गुब्बारों की दुनिया में ही सिमट कर रह गया है। बाहरी दुनिया से उसका कोई संबंध या लगाव भी नजर नहीं आता। शिक्षा का जीवन में उजियारा भरने के लिए समाजसेवी व व्यापारी विकास कर्णवाल ने बीड़ा उठाया है,और शपथ ली है कि वह उस बच्चे को स्कूल में प्रवेश दिला कर उसको शिक्षक की रोशनी से प्रज्वलित करने का कार्य करेंगे। गुब्बारों की दुनिया से निकालकर शिक्षा की रोशनी से उसके जीवन में आशा और विश्वास की नई किरणें जगाने का काम करेंगे।शायद एक नन्ही सी लौ उस नन्हे से सुल्तान के जीवन में आशा की एक नई किरणें लेकर आयें।

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