बरेली। शहर मे ऑटो और ई-रिक्शा वालों के नेटवर्क के चलते इलेक्ट्रिक बसों की सेवा परवान नहीं चढ़ पा रही है। शहर में दौड़ रही सभी 25 इलेक्ट्रिक बसों का लोड फेक्टर भी नहीं निकल रहा है। इन बसों में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए सीसी कैमरे, एसी, अग्निशमन यंत्र, जीपीएस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है, लेकिन यात्री इनकी ओर आकर्षित नहीं हो रहे है। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, करीब साढ़े छह हजार ऑटो के परमिट जारी किए गए हैं और 25 हजार के करीब ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक ऑटो भी चल रहे हैं। सभी के लिए रूट निर्धारित हैं, लेकिन सड़कों पर इनकी संख्या दोगुना से अधिक है। बीते दिनों देहात में चल रहीं इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शहर में शुरू किया गया था, तब अफसर अधिक कमाई की संभावना जता रहे थे। शुरू के दिनों में सवारियों की संख्या 200 से 225 के बीच रही। अब पहले की अपेक्षा सवारियां भले ही बढ़कर डेढ़ हजार के आसपास पहुंच गई हों, लेकिन यह बसें अब भी ऑटो और ई-रिक्शा वालों की मनमानी घाटे से से में चल रही हैं। इनकी मनमानी शहर की सड़कों पर जाम की समस्या भी आम है। वही शहर मे चलने वाले इलेक्ट्रिक बसों का न्यूनतम किराया 11 रुपये तय किया गया है। दूसरी तरफ ऑटो और टुकटुक वालों का किराया भी 10 रुपये तक है। दोनों के किराये में कोई खास अंतर नहीं होने के बाद भी इलेक्ट्रिक बसों में सवारियां नहीं मिलने पर अफसरों का अपना तर्क है कि अवैध ऑटो और ई-रिक्शा की वजह से सवारियां नहीं मिलती है।।
बरेली से कपिल यादव
