बरेली/फतेहगंज पश्चिमी। श्रीमद्भागवत पुराण अपने आप में संपूर्ण ग्रंथ है जहां भागवत कथा होती है वहां सभी प्रकार के देवी देवता के साथ ही गंगा यमुना सरस्वती स्वयं आ जाती है और वहां बैठे हुए सभी श्रोताओं का कल्याण करती है। यह बाते भिटौरा रेलवे स्टेशन के निकट आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बुधवार को विद्वान कथावाचक स्वामी श्री कृष्णाचार्य महाराज ने कही। श्री कृष्ण आचार्य महाराज ने अपने उद्बोधन में सभी श्रोताओं से कहा कि देव ऋषि नारद दृश्यों में श्रेष्ठ हैं और तमाम प्रकार से देवी-देवताओं का कल्याण करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत वही अमर कथा है, जिसे शिव ने माता पार्वती को सुनाया था। अमरनाथ पर पार्वती के लिए जब भगवान शिव ने अमर कथा सुनाई तो इस दौरान वह कथा सुनते सुनते सो गई और जो वहां पर तोता कथा का उत्तर देते रहे। इससे शिवजी को यह एहसास रहा कि पार्वती कथा सुन रही है। जब कथा समापन के बाद शिवजी ने पार्वती से पूछा की कथा आप ने सुन ली तो उन्होंने कहा उन्हें तो नींद आ गई थी शिव ने कहा फिर हूं कर कौन कर रहा था तो बाद में पता लगा कि वह तोता कर रहा था। इसलिए कथा को एकाग्र चित्त होकर के सुनना चाहिए और कथा मंडप मे आगंतुकों के बैठने की समुचित व्यवस्था भी होनी चाहिए। स्वामी ने द्रोपदी के पांचों पुत्रों के संदर्भ में भी बहुत ही मार्मिक ढंग से कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा हम सबका कल्याण करने वाली है। कथा सत्संग से हमें वास्तविक लाभ प्राप्त होता है। कार्यक्रम में कथा से पूर्व कथा आयोजक विनोद कुमार पांडे, पूर्व चेयरमैन सरजू यादव, प्रेमपाल सिंह, केदार सिंह, सूर्य कुमार पाठक, आशीष पांडे, शंकर लाल शर्मा, प्रिंस चौहान ने कथा वाचक श्री आचार्य का माल्यार्पण कर स्वागत वंदन किया।।
बरेली से कपिल यादव
