*नौरादेही अभ्यारण्य में.विस्थापन की धीमी रफ्तार 9 साल बीते 72 में सिर्फ 22गांव हो पाए विस्थापित
मध्यप्रदेश/तेन्दूखेड़ा – तीन जिले की सीमा में फैले हुए प्रदेश के सबसे बड़े नौरादेही वन्य अभ्यारण्य में बाघों की बसाहट के लिए लगातार कार्य हो रहा है वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस अभ्यारण्य का भविष्य उज्जवल माना जा रहा है यदि कार्य सुचारू रूप से होते हैं तो यह अभ्यारण्य भविष्य में दुनिया के मानचित्र पर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब होगा हालांकि भविष्य की प्रस्तावित योजनाओं के क्रियान्वयन के बीच यहां से होने वाले विस्थापन की रफ्तार अभी भी बहुत धीमी है ऐसे में यहां तेजी से योजनाओं का क्रियान्वयन आसान नजर नहीं आ रहा है नौरादेही अभ्यारण्य के अस्थित्व में आने के बाद वर्ष 2015 से इसकी परिधि में आने वाली बसाहटों के विस्थापन के प्रयास जारी है लेकिन कभी बजट का अभाव तो कभी कार्ययोजना की कमजोरी इसकी राह में रोड़ा बनते रहे हैं स्थिति यह है कि 9 साल बीतने के बावजूद विस्थापन का मसला 50 फीसदी ही निपटा है अभी भी हजारों ग्रामीण विस्थापन की बाट जोह रहे हैं हाल ही में शासन से विभाग को अभ्यारण्य के दायरे में आने वाले तीन गावों के 500 से अधिक परिवारों के विस्थापन के लिए 53 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है इसके बाद अभी भी अभ्यारण्य में 48 गांवों विस्थापन के लिए शेष रह जाएंगे 1197 वर्ग किमी में विस्तारित अभ्यारण्य में.वर्तमान में बाघ किशन और बाघिन राधा के जोड़े से जन्मे 7 बाघों सहित पूरे कुनबे की संख्या 10 हो गई है बाघों का कुनबा बढ़ने से इस विशाल जीव को बसाहट के आसपास विचरण करने से ग्रामीणों से संघर्ष की स्थिति से गुजरना पड़ सकता है अभ्यारण्य के दायरे में स्थित गांवों तक शिकारियों की सक्रियता जीवों को जोखिम में डाल सकती है चूंकि नौरादेही अभ्यारण्य को नेशनल पार्क के बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है तो.नेशनल पार्क के लिए यहां अब जल्दी ही जंगल के अंदर बसेरा बनाए परिवारों को बाहर निकलना होगा लेकिन इसकी जो रफ्तार है वह अभी भी ऐसी नहीं दिखाई दिखाई देती जिससे तय समय में नेशनल पार्क का कार्य पूरा हो सकें
धीमी रफ्तार बढ़ा रही आर्थिक भार
जानकारी के अनुसार गत वर्ष तक वन विभाग द्वारा बसाहटों के विस्थापन के दौरान प्रति इकाई( व्यस्क व्यक्ति) 10 लाख रुपए की राशि स्वीकृत थी जो अब बढ़ाकर 15 लाख रुपए कर दी गई है ऐसे में अभ्यारण्य में स्थित 50 गावों के रहने वाले ग्रामीणों को विस्थापन के बदले में दी जाने वाली क्षतिपूर्ति की राशि भी डेढ़ गुना बढ़ गया है
यह तय की गई है प्रक्रिया
विस्थापन की तय प्रकिया में कोर एरिया में बसे 72 गांव के हजारों परिवारों को जंगल छोड़ना होगा इसके लिए वर्ष 2012-13 से विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी और 9 सालों में कोर एरिया से करीब 22गांवों को ही पूरी तरह से विस्थापित किया गया है यहां के अन्य परिवारों को मुआवजा देकर बाहर करने के लिए वन विभाग व जिला प्रशासन कमर कस चुका है वन्य ग्रामों के विस्थापन की केंद्र की गाइड लाइन के अनुसार यहां रहने वाले परिवारों को मुआवजा दिया जा रहा है इस विस्थापन की कार्यवाही में दमोह जिले सहित सागर और नरसिंहपुर जिले के गांव शामिल है
बजट की कमी सबसे बड़ी अड़चन
नौरादेही अभ्यारण्य के दायरे में स्थित गांवों को वन्यजीवों की सुरक्षा को खतरे की आशंका के चलते शासन द्वारा विस्थापन के निर्देश जारी किए गए थे वर्ष 2012-13 से विस्थापन की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण यह बेहद धीमी गति से चल रही है अब तक अभ्यारण्य प्रबंधन आधे गांव ही विस्थापित कर सका है तीन गांव में अभी प्रक्रिया चल रही है जबकि 48 गावों में आगामी कार्ययोजना में बजट की उपलब्धता के आधार पर काम शुरू होगा यदि अधिक बजट स्वीकृत होता है तो अभ्यारण्य के दायरे से ज्यादा से ज्यादा गांवों को बाहर किया जा सकेगा अन्यथा इसमें कई वर्ष और लग सकते हैं
219 में से 72 गा होगा विस्थापन
नौरादेही अभ्यारण्य क्षेत्र में कुल 219 गांव है इसमें से अभ्यारण्य में जंगल के अंदर 74 गांव बसे हैं इनमें से 72 गांव सीधे तौर पर कोर एरिया में बसे हैं इनकों प्राथमिकता से विस्थापित किया जाना है इनमें से अभी तक 22गांवों को पूरी तरह से खाली करा लिया गया है बाकी के 50 गांवों का भी सर्वे हो चुका है वर्तमान में नौरादेही अभ्यारण्य का विस्तार 12सौ वर्ग किलोमीटर है यह सागर दमोह और नरसिंहपुर तीन जिले की सीमा तक फैला हुआ है इसमें छह रेंज आती है जिसमें सर्रा झापन मोहली सिंगपुर नौरादेही और डोंगरगढ़ शामिल हैं
नौरादेही व रानी दुर्गावती अभ्यारण्य को मिलाकर बनेगा टाइगर रिजर्व
वहीं नौरादेही अभ्यारण्य को पन्ना टाइगर रिजर्व की तरह विकसित करने प्रयास किए जा रहे हैं जहां नौरादेही अभ्यारण्य की डायवर्सिटी बाघों के लिए अनुकूल है सागर के नौरादेही अभ्यारण्य और सिंग्रामपुर के रानी दुर्गावती अभ्यारण्य को मिलाकर 1500 वर्ग किलोमीटर में टाइगर रिजर्व बनाया जाएगा इसमें ईको सेंसिटिव जोर भी शामिल रहेगा नौरादेही के अधिकारियों ने इसका प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को जनवरी माह में भेज दिया है कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसी को भेजा जाएगा फिर वहां से एक टीम आएगी जो नौरादेही अभ्यारण्य और रानी दुर्गावती अभ्यारण्य का निरीक्षण करेंगी यदि सबकुछ ठीक रहा तो नौरादेही को टाइगर रिजर्व का दर्ज मिल जाएगा
फैक्ट फाइल
(1)- 1197 वर्ग किमी है नौरादेही अभ्यारण्य का दायरा
(2)- 3जिलों की सीमा को आपस मे जोड़ता है अभ्यारण्य
(3)- 1500 वर्ग किमी में टाइगर रिजर्व नौरादेही अभ्यारण्य और रानी दुर्गावती अभ्यारण्य को जोड़कर बनाया जाएगा
(4)- 10 बाघ बाघिन अभ्यारण्य में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं
(5)- अभ्यारण्य में कोर एरिया में बसे हैं 74 गांव
(6)- अभ्यारण्य के बाहरी हिस्से में बसे हैं 143 गांव
(7)-विस्थापन की जद में आने वाले गांव है 72
(8)- अभी तक विस्थापित हो चुके हैं 22गांव
(9)- भविष्य में विस्थापित होने वाले है 50 गांव
इनका कहना
अभ्यारण्य में रहने वाले ग्रामीणों के विस्थापन की प्रक्रिया जारी है इस वर्ष तीन गांव चिन्हित किए गए हैं जिनके लिए 53 करोड़ रुपए का बजट भी मिला है जल्द ही इन गांवों के विस्थापन का काम पूरा कर लिया जाएगा शासन स्तर से आगे मिलने वाले बजट के आधार पर अन्य गांव भी विस्थापित किए जाएंगे सेवाराम मलिक एसडीओ नौरादेही अभ्यारण्य सागर
– विशाल रजक, तेन्दूखेड़ा
