बरेली। दो दिनों तक चले हंगामे और धरना-प्रदर्शन के बाद निलंबित पीसीएस अधिकारी व बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री बुधवार को पुलिस सुरक्षा मे लखनऊ रवाना हो गए। एडीएम कंपाउंड से उनके काफिले को निकालने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। समर्थकों ने गाड़ियों को घेर लिया और जबरदस्त नारेबाजी के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ने से पहले पुलिस ने किसी तरह काफिले को बाहर निकाला। इस दौरान अलंकार को किसी से बातचीत करने का अवसर नही दिया गया। अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह के बाद अपने पद से इस्तीफा देकर सनसनी फैला दी थी। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले मे शंकराचार्य व उनके शिष्यों के कथित अपमान तथा यूजीसी के नए नियमों को लेकर विरोध जताया था। सोमवार देर रात शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया, जिसके बाद उनके समर्थन में विभिन्न संगठनों ने धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। बीते दो दिनों से एडीएम कंपाउंड के आसपास लगातार हंगामा हो रहा था। अलंकार को समझाने के लिए बुधवार सुबह प्रशासन ने उनके करीबी परशुराम युवा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन मिश्रा समेत अन्य लोगों की मदद ली। परिवार के दो सदस्य भी बरेली पहुंचे। अलंकार को यह कहकर भी समझाया गया कि उनके बच्चे की तबीयत खराब है। ऐसे मे अलंकार लखनऊ जाने को तैयार हो गए। दोपहर ढाई बजे जैसे ही गाड़ियों का काफिला निकला। समर्थकों ने गेट पर वाहनों को रोक लिया। कुछ लोग गाड़ियों के आगे लेट गए। पुलिस ने धक्का-मुक्की के बीच काफिले को रवाना कराया। नाराज समर्थकों ने कुछ देर के लिए सड़क जाम कर दी लेकिन समझाने के बाद शांत हुए। बुधवार सुबह अलंकार अग्निहोत्री एडीएम कंपाउंड ने गेट पर खड़े होकर मीडिया से बातचीत मे खुद को हाउस अरेस्ट करने का आरोप लगाया था। साथ ही उन्होंने अपने और अपने करीबियों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाए जाने का भी दावा किया था। दोपहर बाद अलंकार अग्निहोत्री को पुलिस एस्कॉर्ट के साथ लखनऊ भेज दिया गया।।
बरेली से कपिल यादव
