बरेली। जीआईसी ऑडिटोरियम में मिशन शक्ति कौशल वर्कशॉप में ऑनलाइन जुड़े डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद शुरुआती दस मिनट छवि बनाने और बिगाड़ने का काम करते हैं। इसलिए संवेदनशील होकर पीड़ित से संवाद कर समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने मिशन शक्ति केंद्र (एमएसके) को एक ब्रांड की तरह स्थापित कर सेवा मानक निर्धारित करने के निर्देश दिए। कार्यशाला का उदेश्य चरेली, बदायूं पीलीभीत और शाहजहांपुर जनपदों में स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों के प्रमाची संचालन, महिला अपराधों को रोकथाम और टीमों की कार्यक्षमता को और बेहवर बनाना रहा। कार्यशाला को पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने बीडीयो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने मिशन शक्ति केंद्रों से जुड़े नोडल अधिकारियों और टीमों के कार्यों की सराहना करते हुए महिला संबंधी अपराधों में संवेदनशीलता, तत्वरित कार्रवाई और समन्वित प्रयासों पर जोर दिया। महिला सुरक्षा को शासन की शीर्ष प्राथमिकताओं में बताते हुए उन्होंने मिशन शक्ति केंद्रों को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि थाना स्तर पर मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना काफी कारगर साबित हुई है। यहां सबसे अधिक महत्वपूर्ण कारक संवाद और संवेदनशीलता है। यहां आने वाले पीड़ितों के लिए पहले दस मिनट बहुत महत्वपूर्ण हैं। उनको बात गंभीरता से सुनकर उनका समाधान करें। इसके सार्थक परिणाम भी देखने को मिले है। अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन रमित शर्मा, मंडलायुक्त बरेली भूपेंद्र एस चौधरी और पुलिस उप महानिरीक्षक बरेली परिक्षेत्र अजय कुमार साहनी ने कार्यशाला मे उपस्थित अधिकारियों को मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति केंद्र केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम नहीं बल्कि पीड़िता के लिए एकल संपर्क बिंदु के रूप में कार्य करें, जहां उसे परामर्श, कानूनी सहायता, चिकित्सा सहयोग और पुनर्वास तक हर स्तर पर मदद मिले। डीजीपी ने जल्द ही प्रत्येक केंद्र को चार स्कूटी और दस्तावेजी प्रक्रिया कम करने की बात कही। उन्होंने डीआईजी अजय साहनी के प्रयास की सराहना की और एसएसपी अनुराग आर्य ने पहले सत्र के समापन पर धन्यवाद ज्ञापित किया। आंवला परामर्श केंद्र से पहुंचे जय गोविंद सिंह ने 100 टूटते परिवारों के सफल मध्यस्थता के जरिये एक करने अनुभव साझा किए गए। उन्होंने बताया कि किस तरह मिशन शक्ति केंद्र ने इन परिवारों से संवाद स्थापित कर विवादों को सुलझाया। सीडीओ देवयानी ने बताया कि पीड़िताएं किस तरह सरकारी योजनाओं की मदद प्राप्त कर सकती है। संचालन एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने किया। कार्यक्रम में एडीजी महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन पद्मजा चौहान ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया। एसआरएमएस के डॉ. जसविंदर सिंह ने महिला अपराध होने पर कार्रवाई और साक्ष्य संकलन की जानकारी दी। मनोवैज्ञानिक डॉ. मनाली ने पीड़ित के साथ शुरुआती दस मिनट के महत्व पर प्रकाश डाला। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. शांतनु ने महिला संबंधी अपराध में विवेचनात्मक मानक पर व्याख्यान दिया।।
बरेली से कपिल यादव
