तनोट से 725 किलोमीटर की ओरण पदयात्रा शुरू, पैदल जयपुर पहुंचेंगे पर्यावरणप्रेमी

राजस्थान/बाड़मेर- ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की मांग को लेकर जैसलमेर के तनोटराय मंदिर से जयपुर तक 725 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू हुई। यात्रा की शुरुआत विश्व विख्यात चमत्कारी मातेश्वरी तनोटराय मंदिर में विधिवत पूजा- अर्चना के साथ की गई। टीम ओरण के सुमेर सिंह सांवता ने बताया कि पिछली बार जिला प्रशासन ने ओरणों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए तीन माह का समय मांगा था, जिसकी अवधि 19 जनवरी को पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे जैसलमेर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान में भारी आक्रोश व्याप्त है। इसी कारण इस बार जनता ने जयपुर पहुंचकर अपनी मांग को मजबूती से रखने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि सुदूर सीमा क्षेत्र स्थित मातेश्वरी तनोटराय से आशीर्वाद लेकर सैकड़ों लोग इस पदयात्रा में शामिल हुए हैं। यह यात्रा लगभग एक महिने में जयपुर पहुंचेगी। मार्ग में आने वाले विभिन्न नगरों में बड़ी ओरण सभाओं का आयोजन किया जाएगा और जयपुर पहुंचते-पहुंचते हजारों लोग इस आंदोलन से जुड़ेंगे। जयपुर पहुंचकर सरकार के समक्ष सशक्त विरोध दर्ज कराया जाएगा।

पर्यावरणप्रेमी भोपाल सिंह झलोड़ा ने बताया कि अकेले जैसलमेर जिले की करीब 100 ओरणों सहित पूरे राजस्थान में लगभग 25 हजार ओरणें मौजूद हैं, जिनकी लाखों हेक्टेयर भूमि में से बहुत कम हिस्सा ही राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। अधिकांश ओरणें ‘मुंह बोली’ हैं, जिन्हें दर्ज करने की लंबे समय से मांग की जा रही है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की वर्ष 2020 की रिपोर्टों में भी इन क्षेत्रों में हो रहे नुकसान का उल्लेख है, इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुंह बोली ओरणों में स्थानीय लोगों के परंपरागत अधिकारों को नजरअंदाज कर सरकार द्वारा अंधाधुंध कंपनियों को भूमि आवंटित की जा रही है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। इससे पशुपालकों की आजीविका संकट में है, पश्चिमी राजस्थान के जल स्रोतों और आस्था स्थलों को नुकसान पहुंच रहा है तथा खड़ीन खेती के आगौरों पर कब्जों के कारण किसानों का रोजगार छिन रहा है।

पदयात्रा में शामिल लोगों ने कहा कि ओरणों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर इस गंभीर मुद्दे को टाल दिया जाता है।

– राजस्थान से राजूचारण

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