औरण गौचर भूमि पदयात्रा में सुमेर सिंह सावंता के सारथी बने निर्दलीय विधायक रविन्द्र भाटी

राजस्थान/बाड़मेर- बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने गुरुवार रात जोधपुर के बालेसर में ‘ओरण बचाओ पदयात्रा’ में शामिल होकर एक भावुक और प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। उन्होंने पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह को अपने कंधों पर बैठाकर लगभग एक किलोमीटर पैदल कन्धों पर बिठाकर चले, यह दृश्य पदयात्रा में मौजूद लोगों के लिए बहुत भावुक रहा. विधायक ने कहा कि बुजुर्गों का मान सम्मान और उनकी आवाज को बुलंद करना ही हमारा कर्तव्य है।

विधायक रविंद्र भाटी ने पदयात्रा में शामिल लोगों के साथ ही रात बिताई और चामुंडा माता मंदिर परिसर बालेसर में जमीन पर ही सोए उन्होंने कहा, “एक रात घर से बाहर रहने पर परिवार से फोन आ जाता है, लेकिन 32 दिन सबकुछ छोड़कर धरने पर बैठना हंसी का खेल नहीं है.” भाटी ने स्पष्ट किया कि वे किसी पार्टी के नहीं हैं—न बीजेपी ने कुछ दिया, न कांग्रेस ने. “मैं सच के लिए आंख से आंख मिलाकर बात करता हूं।

जैसलमेर के तनोट माता मंदिर से इक्कीस जनवरी को शुरू हुई ‘ओरण बचाओ पदयात्रा’ गुरुवार रात बालेसर पहुंची. औरण गौचर भूमि बचाओं अभियान के सुमेर सिंह सावंता और भोपाल सिंह के नेतृत्व में चल रही यह यात्रा राजधानी जयपुर की ओर बढ़ रही है, जिसमें कुल 725 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी. यात्रा में दस साल के बच्चे से लेकर अस्सी साल तक के बुजुर्ग शामिल हैं।

औरण गौचर भूमि बचाओं अभियान की जयपुर पदयात्रा के प्रेरक और बाड़मेर जैसलमेर पर्यावरण विद्वान सुमेर सिंह सावंता ने कहा कि पाच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है और पूरे देश में लाखों करोड़ों लोगों द्वारा पौधे रोपण करते हुए सोशलमीडिया पर फोटो अपलोड जरूर किया जाता है लेकिन वो पौधे पेड़ कब तक बनेगा ये कोई भी व्यक्ति नहीं बता सकता है। कारण पौधे रोपण करने के बाद में एक छोटे बच्चे की तरह उसकी देखभाल करना चाहिए समय समय पर खाद पानी और अन्य कृषि तकनीक का उपयोग करेंगे ताकि पानी से पूरा पोषण मिलता रहेगा तो एक पेड़ के रूप में आपको खुशियाँ की छाया देगा लेकिन वो पेड़ आजकल आधुनिकता की अन्धी दुनिया में विकास के नाम पर औरण गौचर भूमि पर भी धड़ाधड़ काटे जा रहे हैं इसमें कोई शक शुबहा नहीं है।कहीं पर औधोगिक क्रांति के नाम पर औधोगिक घरानों द्वारा मरूँ भूमि पर सैकड़ों सालों से लगे हुए पेड़ पौधों को काटकर बर्बादी की और अग्रसर करने पर तुले हुए हैं और हमारे यहाँ के बुजुर्गों ने कितने दुख झेल कर इन्हें पौधों से एक विशाल पेड़ बनाया है इसकी कटाई होने का दुख होता है इसके विरोध में धरना प्रदर्शन चलता है तो कहीं पर विवाद आखिरकार कटना तो विशाल पेड़ को होगा छोटे छोटे पौधे को नहीं।

पोधे से पेड़ बनाने के लिए कई स्वयं सेवी सस्थानो द्वारा सरकार से लाखों करोड़ों रुपये का सी एस आर फण्ड का बन्दर बांट करने का ठेका लेते हैं लेकिन वो पेड़ बनने से पहले ही हर साल पौधे सूखे ठूठ होकर वापस मिट्टी में तब्दील हो जाता है और अगले साल पर्यावरण दिवस आने का सिर्फ इन्तजार करते है।

जानकर बी एल शर्मा ने कहा कि पर्यावरण दिवस लेकिन इसका मुख्य बिंदु होगा अपनी पृथ्वी को बचाना, मरुस्थलीकरण ना होने देना एवं अपनी पृथ्वी को सूखे के चपेट से निकाल कर हरी भरी पृथ्वी का निर्माण करना। जैसा कि हम देख रहे हैं कि वर्तमान समय में आसमान से आग बरस रही है जिसके चलते घर से निकालना बहुत ही कठिन कार्य है यही कारण है कि तमाम सारे काम धंधे लगभग चौपट हो चुके हैं क्योंकि इंसान अब तभी घर से बाहर निकल रहा है जब उसे बहुत ही ज्यादा आवश्यक कार्य होता है। और जान की सुरक्षा के लिए ऐसा करना आवश्यक भी है। अपने शरीर को हीट वेव से बचाए रखने के लिए और शरीर में ताजगी बनाए रखने के लिए हमें थोड़ी-थोड़ी देर पर पानी या पेय पदार्थ पीते रहना चाहिए विशेष कर नींबू पानी।

पिछले कुछ दशकों में विकसित बाड़मेर जैसलमेर जिले में विकास के बहाने से बेतहाशा पेड़ों की अवैध कटाई के चलते पृथ्वी “ग्लोबल वार्मिंग” का सामना कर रही है ऐसा अनुमान है कि यदि इसी तरह चलता रहा तो 2030 तक डेढ़ से दस डिग्री सेल्सियस तक तापमान और बढ़ जाएगा वृक्षों के बेतहासा कटान से जहां एक तरफ गर्मी बढ़ रही है वहीं दूसरी तरफ कम बारिश की समस्या भी लगातार बनी हुई है। जिसकी वजह से पानी वाली फसलों की उपज कम होती जा रही है। प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता सा जा रहा है यदि हमने समय रहते नहीं चेता तो निश्चित ही हमारी आने वाली पीढ़ियां बहुत भयंकर समस्याओं में जकड़ कर रह जाएंगी और हमें कभी माफ नहीं करेंगी इसलिए हमें समय रहते अपनी पृथ्वी को स्वच्छ एवं सुंदर तथा हरा भरा बनाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करना चाहिए।

औरण गौचर भूमि बचाओं अभियान से प्रेरित होकर जर्नलिस्ट काउंसिल आफ इण्डिया संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अनुराग सक्सेना ने कहा कि “यदि वृक्ष ही धरा पर नहीं रहेंगे तो इंसानी जीवन भी कल्पना मात्र ही होगा” इसी को ध्यान में रखते हुए जर्नलिस्ट काउंसिल आफ इंडिया ने यह निर्णय लिया है कि हम और हमारे सम्मानित पत्रकारगण डिस्पोजेबल प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करेंगे, कम दूरी के लिए वाहन का प्रयोग नहीं करेंगे और जहाँ तक सम्भव हो पैदल चलने का प्रयास करेंगे और जहां तक हो सकेगा दूसरों को भी इसका प्रयोग करने के लिए प्रेरित करेंगे। उपजाऊ जमीन को बन्जर होने से बचाने के लिए उर्वरकों एवं कीटनाशकों का सीमित प्रयोग करेंगे। लोगों को कंपोस्ट खाद एवं जैविक खाद के बारे में जानकारी देकर यह बताएंगे कि इससे हमारी पृथ्वी ताकतवर होगी और अधिक बेहतर फसल पैदा होगी तथा हम अपने मित्रों को अधिक से अधिक वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

– राजस्थान से राजूचारण

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