लखनऊ – इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर हुआ आतंकी हमला अत्यंत कायरतापूर्ण, निंदनीय और मानवता को झकझोर देने वाला अपराध है। नमाज़ और इबादत के दौरान बेगुनाह मोमिनीन को निशाना बनाना न सिर्फ़ इस्लाम की रूह के ख़िलाफ़ है बल्कि इंसानियत पर सीधा हमला है। हम, एक भारतीय शिया मुसलमान के नाते, इस वहशी कृत्य की घोर निंदा करते हैं।
दुख और आक्रोश के साथ यह कहना अनिवार्य हो गया है कि पाकिस्तान में शिया समुदाय वर्षों से संगठित फिरक़ावाराना आतंकवाद का शिकार है। शिया मस्जिदें, इमामबारगाहें और मजलिसें बार-बार निशाना बनती रही हैं, लेकिन पाकिस्तान की सरकार और वहां की व्यवस्था या तो मूकदर्शक बनी रही है या फिर आतंकवादी संगठनों के ख़िलाफ़ निर्णायक कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही है।
आतंकवाद के नाम पर दोहरी नीति, चुनिंदा कार्रवाई और कट्टरपंथी तत्वों को अप्रत्यक्ष संरक्षण ने आज हालात को इस हद तक पहुंचा दिया है कि आम शिया मुसलमान की जान वहां सबसे असुरक्षित हो गई है। यह हमला किसी एक मस्जिद पर नहीं, बल्कि अमन, भाईचारे और इंसाफ़ की बुनियाद पर किया गया हमला है।
एक भारतीय शिया मुसलमान के रूप में हम साफ़ शब्दों में मांग करते हैं कि:
• पाकिस्तान सरकार आतंकवादी और तकफ़ीरी संगठनों के खिलाफ़ बिना किसी भेदभाव के सख़्त और ईमानदार कार्रवाई करे
• शिया समुदाय और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की जान, इज़्ज़त और इबादतगाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करे
• अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान में शिया नरसंहार और आतंकवाद पर गंभीर संज्ञान ले
हम शहीद हुए मोमिनीन के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की दुआ करते हैं। ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना हमारा दीन, हमारी इंसानियत और हमारी ज़िम्मेदारी है। आतंकवाद के सामने ख़ामोशी अब गुनाह के बराबर है।
