बरेली। मध्य एशिया मे हुए संघर्ष का सीधा असर भारत मे रसोई गैस की सप्लाई पर पड़ा है। जिससे शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक मे गैस की भारी किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने के साथ ही सिलेंडर के लिए लोगों को हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है। वही कालाबाजारी मे सिलेंडर दोगुने-तिगुने दाम पर मिल रहे हैं। हालांकि एक ओर प्रशासन स्टॉक पर्याप्त होने का दावा किया है। शहरी क्षेत्र मे जहां सिलेंडर डिलीवरी के 25 दिन बाद बुकिंग का नियम लागू है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों मे यह 45 दिन का बनाया नियम उन्हें परेशान कर रहा है। ग्रामीण इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर परेशानियों का सामना कर रहे है। सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार एक सिलिंडर की बुकिंग 45 दिन बाद ही की जा सकती है। वही बुकिंग के बाद भी गैस मिलने में करीब आठ दिन का समय लग रहा है। वही जनपद मे उज्जवला योजना के तहत कुल 416736 तीनों गैस कंपनियों के कुल उपभोक्ता हैं। नये नियमों के तहत उज्जवला उपभोक्ता भी सिलेंडर डिलीवरी के 45 दिन बाद बुकिंग करा सकते हैं। कंपनियों द्वारा अपने वितरकों से दैनिक आपूर्ति का जो आंकड़ा लिया जा रहा है। उसमें विशेष उल्लेख डीएसी का रहता है। यह जानकारी ली जाती है कि कितने उपभोक्ताओं को बगैर डीएसी के आपूर्ति दी गई। जिस वितरक का यह रिकॉर्ड शत प्रतिशत नहीं होता, उन पर निगेटिव मार्किंग का नियम लागू हो रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि मांगलिक कार्यक्रमों के लिए अभी तक एक हजार के करीब कार्ड समेत आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं। इसमें से 900 लोगों को कॉमर्शियल सिलेंडर भी दिला दिए गए हैं। शेष 100 आवेदनों की जांच करा उन्हें भी जल्द सिलेंडर दिलाए जाएंगे। वही लगातार शिकायतें मिल रही है कि कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान घरेलू गैस सिलिंडरों का उपयोग कर रहे हैं। कुछ जगहों पर बिना वैध कनेक्शन के कॉमर्शियल सिलेंडर भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।।
बरेली से कपिल यादव
