बरेली। सेटेलाइट बस अड्डे पर करीब 12 फीट गहरे नाले मे गिरे व्यक्ति की खोजबीन के लिए 30 घंटे से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है लेकिन उसका कोई सुराग नही लगा है। मंगलवार की देर रात से शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन बुधवार को दिन भर चला। एसडीआरएफ की टीम के साथ नगर निगम के कर्मचारी खोजवीन मे जुटे है। मामला मुख्यमंत्री कार्यालय और नगर विकास मंत्री तक पहुंच गया है। इसके बाद नगर आयुक्त से लेकर अतिक्रमण प्रभारी और पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी खुद जुट गए। मंगलवार की रात करीब 9:30 बजे सेटेलाइट बस अड्डे पर खुले हुए नाले के पास बैठा एक व्यक्ति अचानक नाले मे जा गिरा। आसपास मौजूद यात्रियों और दुकानदारों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो उसमे युवक नाले मे गिरता दिखाई दे रहा है। इसके वाद थाना बारादरी पुलिस और रेस्क्यू टीमें सक्रिय हो गई और रात से सुबह तक रेस्क्यू अभियान चलाया लेकिन उस व्यक्ति का पता नही लगा। निगम और एसडीआरएफ की टीम ने नाले की सफाई मशीनों से कराई। नाले का पानी निकालने का काम रात तक चलता रहा लेकिन वुधवार की रात तक व्यक्ति को नही तलाशा जा सका। इस घटना ने शहर के नालों की सुरक्षा और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। बस अड्डे जैसे सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले स्थान पर नाला खुला होना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। मामला शासन तक पहुंचने के बाद लखनऊ से अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन से पूरी रिपोर्ट तलब की है। नाले मे गिरे युवक की तलाश के लिए सर्च रेडियस बढ़ा दिया गया है। रात हो जाने पर सर्च ऑपरेशन के लिए रोडवेज के किनारे बल्लियों पर लाइटें लगाकर व वैरिकेडिंग कर रेस्क्यू किया रहा है। पानी निकालने के लिए देर शाम को चार पंप सेट लगाए गए। कुछ लोगों ने यह बात उड़ा दी थी की विवाद के बाद युवक को किसी ने धक्का दे दिया था लेकिन सीसीटीवी में साफ दिख रहा है कि वह नाले के पास दीवार पर बैठा है और अचानक से नाले में गिर जाता है। हादसों से नही चेता निगम व्यस्त जगहों पर खुले नाले: सेटेलाइट बस अड्डे पर नाले मे गिरे युवक का बुधवार रात तक सुराग नही लगा लेकिन इस घटना ने एक बार फिर नगर निगम की लापरवाही उजागर कर दी। आलम यह है कि शहर में सार्वजनिक स्थानों पर कई जगह खुले नाले हैं जहां हर समय हादसे का खतरा बना हुआ है। बावजूद इसके निगम सिर्फ कागजी दावे ही पेश कर रहा है, जबकि हर साल नाला सफाई समेत अन्य कार्यों पर निगम दो करोड़ से भी अधिक खर्च करता है। शहर के सुभाषनगर, शांतिविहार मुख्य मार्ग, डेलापीर समेत बड़ी संख्या में ऐसे सार्वजनिक क्षेत्र हैं। जहां सुबह से लेकर रात तक बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन और राहगीरों का आना-जाना रहता है, लेकिन यहां लंबे समय से खुले नाले जस के तस पड़े हैं। अधिकांश नालों में बाउंड्रीवाल तक नहीं बनी है। अन्य बचाव के इंतजाम भी नाकाफी है। लोगों का कहना है कि बारिश में जब नाला उफनाता है तो रात में गुजरते समय सबसे ज्यादा हादसे का खतरा रहता है।।
बरेली से कपिल यादव
