जब ईश्वर की बनाई व्यवस्थाओं पर पानी फिर सकता है तो रेडीमेड इंसानों की औकात ही क्या हैं : रविन्द्र सिंह भाटी

राजस्थान/बाड़मेर- जो लोग अपने किए कार्यों पर अभिमान घमंड करते हैं, उन्हें इस आंधी तूफान से सबक लेना चाहिए। जब ईश्वर की बनाई ऋतुएं बदल सकती है, तब इंसान की औकात ही क्या है। कुछ लोग कह सकते हैं कि इंसान ने औरण गौचर भूमियों पर जानबूझकर प्रकृति के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की है, उसी का परिणाम यह आंधी तूफान आया है। ऐसे ही लोग इसे ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम बता रहे हैं। प्रकृति को जानने वाले विज्ञानी कुछ भी कहे, लेकिन यह आंधी तूफान इंसान को सबक सिखाने वाला है।

भारत के लोकतंत्र में आजकल बहुत से लोग घमंड करते हैं। ऐसे लोग भी इस आंधी तूफान से सबक ले सकते हैं। हमारे देश के लोग पहले ही कोरोना वायरस की वजह से परेशान रहे, उसके बाद बहुत विनाशकारी ताऊ-ते तूफान आ गया था। जब 175 किलो प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं और पानी एक साथ आ रहे हों, तब इंसान की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इंसान के बनाए हुए विकास के बहाने उजाड़ रहे जंगल पर आलीशान बंगले और पक्के मकान कुछ ही क्षणों में धराशाई जमीं दोज होकर मिट्टी में पुनः तब्दील हो गए।

कल रात आए भीषण आंधी- तूफ़ान को लेकर एक बुजुर्ग महिला ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “मैंने अपनी 60-70 वर्ष की उम्र में ऐसा जलजला कभी नहीं देखा। रातभर बच्चे डर के मारे रोते रहे। हमने पांच साल की मेहनत से जो मकान बनाया था, वह इस आंधी तूफ़ान में उजड़ गया। इससे हमें लगभग 5 से 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।”

बाड़मेर जैसलमेर सड़क मार्ग पर स्थित देवका में कल रात में आए तूफान के जरिये औधोगिक घरानों की पवन चक्की को तहस नहस कर प्रकृति ने शायद संदेश दिया है कि मेरे साथ खिलवाड़ मत करो, नहीं तो अंजाम ऐसा ही होगा।

राज्य सरकार और जिला प्रशासन बाड़मेर जैसलमेर और बालोतरा को चाहिए कि इस आपदा से हुए नुकसान का जल्द सर्वे करवाए और प्रभावित तथा जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करे, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

सेवानिवृत्त इन्जीनियर बी एल शर्मा ने कहा कि ईश्वर ने मौसम की जो व्यवस्थाएं बनाई है उसके अनुसार मई माह में भारत के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी पड़नी चाहिए। गर्मी भी ऐसी कि समुद्र का पानी उबलने और रेगिस्तान की रेत जैसे आग उगलने लगे। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इन दिनों सूरज की किरणें सीधी भारत की धरती पर आती है, इसलिए ऐसी गर्मी पड़ती है।यानी प्रथ्वी पर मौसम की यह व्यवस्था ईश्वर ने बनाई है, लेकिन समुद्र के किनारे वाले राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात के लोग देख रहे हैं कि मई जून माह के मध्य में आसमान से जोरदार पानी टपक रहा है। वहां पर मौसम ठंडा हो गया है। यानी ईश्वर ने श्रद्धालुओं के लिए जो व्यवस्था बनाई उस पर पानी फिर गया है। समुद्र में पिछले सालों उठे ताऊ-ते तूफान ने मौसम में ऐसा परिवर्तन किया कि मौसम विज्ञानी भी आजकल सोच में पड़ गए हैं। सवाल ताऊ-ते तूफान की तबाही का नहीं है, सवाल तूफान के आने और मौसम तंत्र-मंत्र के बिगड़ने का है? आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक तूफान ने ईश्वर की व्यवस्थाओं पर भी पानी फेर दिया ?

पहले कहा गया था कि यह तूफान समुद्र किनारे वाले राज्यों पर ही असर करेगा, लेकिन ताऊ-ते तूफान रेगिस्तान माने जाने वाले राजस्थान में घुस आया। रेतीले राजस्थान में तो समुद्र नहीं है, लेकिन फिर भी प्रदेश के पश्चमी जिलों में इस तूफान का खासा असर है। जब राजस्थान में आंधी तूफान की तेज हवाएं और बरसात औधोगिक घरानों की बिजली के हजारों खंभे से लेकर बडे़ बडे़ पेड़ तक उखड़ रही हैं, तब थार रेगिस्तानी इलाकों में ऐसे हालत बन जाता है तो फिर समुद्र किनारे महाराष्ट्र गुजरात, गोवा आदि राज्यों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बाड़मेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आए भीषण तूफान एवं तेज आंधी से हुए व्यापक नुकसान को लेकर जिला कलक्टर बाड़मेर को पत्र लिखकर प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र सर्वे करवाने तथा पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने की मांग की है।

विधायक भाटी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि विधानसभा क्षेत्र शिव के शिव, हरसानी, गडरारोड़, रामसर सहित बाड़मेर जैसलमेर जिले के अनेक गांवों में आए भीषण तूफान और तेज आंधी के कारण जन-धन की व्यापक हानि हुई है। प्राकृतिक आपदा के चलते कई ग्रामीणों के मकान, झोंपड़ियां, पशुबाड़े, विद्युत कनेक्शन तथा पेयजल संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इसके साथ ही किसानों की अनार एवं खजूर जैसी महत्वपूर्ण फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे ग्रामीणों और किसानों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गयाकरेग पत्र में विधायक भाटी ने यह भी कहा कि कई स्थानों पर पेड़ एवं विद्युत पोल गिर जाने से आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा जनजीवन प्रभावित हुआ है। ऐसे में प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए वास्तविक नुकसान का निष्पक्ष आकलन कराया जाना अत्यंत आवश्यक है।

विधायक भाटी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में हुए नुकसान के आकलन हेतु संबंधित उपखण्ड अधिकारियों एसडीएम की अध्यक्षता में विशेष सर्वे एवं मूल्यांकन समितियों का गठन किया जाए। साथ ही समितियों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल दौरा कर वास्तविक क्षति का आंकलन किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को राज्य सरकार के प्रावधानों एवं आपदा राहत नियमों के अंतर्गत शीघ्र आर्थिक सहायता और राहत प्रदान की जा सके।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवार पहले से ही कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में प्रशासन एवं सरकार की जिम्मेदारी है कि पीड़ितों को समय पर राहत उपलब्ध कराकर उन्हें संबल प्रदान किया जाए। विधायक भाटी ने आशा व्यक्त की कि जिला प्रशासन संवेदनशीलता के साथ मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र राहत कार्य सुनिश्चित करेगा।

— राजस्थान से राजूचारण

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