गैस सिलेंडर मिल नही रहा, खानपान भी हुआ महंगा, गांव लौट रहे पढ़ने वाले छात्र

बरेली। ईरान व इस्राइल-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध से एलपीजी गैस की किल्लत कम होने का नाम नही ले रही है। गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लाइन कम होने का नाम नही ले रही हैं। वही व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति न होने से होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई व नमकीन विक्रेता और कैटर्स का व्यापार चौपट हो रहा है। दुकानदार अंगीठी, कोयले की भट्ठियों पर काम को मजबूर है। सिलेंडर आपूर्ति न होने से सबसे अधिक परेशानी शहर मे रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को हो रही है। गैस न मिलने से वे गांव लौटने को मजबूर है। घरेलू गैस सिलेंडर हो या व्यावसायिक इन दिनों आसानी से न मिलने के कारण हर कोई परेशान हैं। मारामारी के बीच होटल व रेस्टोरेंट संचालकों ने समोसा, जलेबी से लेकर नाश्ते के दाम मे वृद्धि कर दी है। 10 रुपये मे मिलने वाले समोसे का दाम 12 व सात रुपये मे मिलने वाला समोसा 10 रुपये मे मिल रहा है। यही नही 20 रुपये मे मिलने वाली कचौड़ी के दाम 30 रुपये कर दिए गए है। गोलगप्पे के दाम बढ़ने के साथ पूड़ी सब्जी की प्लेट भी महंगी हो गई है। इसे लेकर दुकानदारों ने दबी जुबान मे बताया कि किसी तरह दोगुने दामों में सिलेंडर मिल पा रहा है। वही कुछ ने बताया कि कोयला व तेल के दाम बढ़ने के कारण मजबूरन रेट बढ़ाने पड़े है। रसोई गैस के लिए मची आपाधापी के बीच सिलेंडर की मांग में प्रतिदिन वृद्धि हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, सामान्य दिनों में जहां प्रतिदिन औसतन 20 हजार गैस सिलेंडर बुक होते थे। वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर करीब 30 हजार को पार कर चुकी है। एजेंसी मालिकों का कहना है कि पहले सामान्य दिनों में होने वाली बुकिंग की तुलना में तीन गुना बुकिंग हो रही है। कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि यह एक यूनिफाइड सिस्टम है। यदि कोई उपभोक्ता निर्धारित समय से पहले बुकिंग करने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे ऑटो-ब्लॉक कर देगा। इसका मुख्य उद्देश्य गैस की कालाबाजारी को रोकना और आपूर्ति को सुव्यवस्थित करना है। उपभोक्ता अधिक जानकारी या सहायता के लिए अपने वितरक से संपर्क कर सकते हैं। या टोल-फ्री नंबर 1800-2333-555 पर कॉल कर सकते है।।

बरेली से कपिल यादव

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