बरेली। खाड़ी देशों मे चल रहे युद्ध के चलते लगातार गैस किल्लत की बनी हुई है। गैस एजेंसियों पर सुबह से शाम तक लोगों की लंबी कतारें लगी हुई है। इसके बाद भी उन्हें समय पर सिलिंडर नही मिल रहा है। ऐसे मे लोगों ने जब चूल्हे पर भोजन पकाना आरंभ किया तो लकड़ी और कोयले पर भी महंगाई की आंच लग गई। आलम ये है कि लकड़ी के दाम मे जहां 30 तो कोयले के दाम मे 20 फीसदी का इजाफा हो गया है। जिससे लोगों को आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। कोयला कारोबारियों का कहना है कि कोयले की आपूर्ति झारखंड से होती है लेकिन दस दिन पहले अचानक मांग बढ़ने पर कई ग्राहकों को वापस भी करना पड़ा। शहर मे तीन से चार ही कोल डिपो संचालित है जबकि लकड़ी बिक्री की टाल की संख्या 15 से अधिक है। पिछले 20 दिनों से लकड़ी की बिक्री महज एक दो क्विंटल थी जो कि आचनक से बढ़ कर तीन से चार क्विंटल प्रतिदिन तक पहुंच गई है। वहीं लकड़ी के कोयले की खपत ने तेजी पकड़ी है। प्रतिदिन 50 से 100 क्विंटल की बिक्री एक डिपो से हो रही है। कारोबारियों के अनुसार फरवरी के अंत तक लकड़ी के दाम तीन से चार रुपये किलो थे। वही अब 6 रुपये किलो बिक रहा है। वही गिल्टे के दाम भी 10 से 12 रुपये किलो है। इनके दाम में भी बीस फीसदी इजाफा हुआ है। जबकि पत्थर के कोयले के कीमत 2000 रुपये क्विंटल से बढ़कर 2200 और लकड़ी के कोयले की कीमत 4000 से 4100 रुपये हो गई है।।
बरेली से कपिल यादव
