बरेली। स्मार्ट सिटी बरेली मे एक परदेसी को सिर्फ इसलिए अपनी जान से हाथ धोना पड़ा क्योंकि बरेली के सैटेलाइट बस अड्डे पर हजारों यात्रियों की आवाजाही के बाद भी नाला खुला छोड़ दिया गया था। हरदोई का ट्रक ड्राइवर तौहीद लड़खड़ाकर नाले मे समा गया। सिस्टम को आइना दिखाती इस अनहोनी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है, इसके लिए अफसरों की जांच कमेटी बनी है। दावा है कि अपर नगर आयुक्त शशि भूषण राय की अध्यक्षता मे दो सदस्यीय कमेटी दो दिन मे अपनी रिपोर्ट देगी। जिसके बाद तय होगा कि हादसे के लिए दोषी कौन है?। नाले में समाकर एक यात्री की मौत ने स्मार्ट सिटी बरेली पर ऐसा दाग लगाया है जो मिटाए नहीं मिटेगा। सिस्टम को भले अपनी गलती का एहसास न हो मगर शहर के वासी तौहीद की मौत पर शर्मिंदगी का एहसास जरूर कर रहे है। सेटेलाइट क्षेत्र मे एक दर्दनाक हादसे में 30 वर्षीय युवक की खुले नाले मे गिरने से मौत हो गई। करीब 30 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार देर रात उसका शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान तौहीद (30) के रूप मे हुई है जो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद देहात क्षेत्र का निवासी था। उसकी पहचान पैंट की जेब से मिले आधार कार्ड के जरिए की गई। पुलिस अब उसके परिजनों से संपर्क करने मे जुटी है। बताया जा रहा है कि तौहीद बस पकड़ने के लिए इलाके मे आया था। इसी दौरान वह खुले नाले में गिर गया। नाले का स्लैब खुला होने के कारण यह हादसा हुआ, जिसे नगर निगम की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। 30 घंटे चला रेस्क्यू घटना के बाद एसडीआरएफ, नगर निगम और फायर ब्रिगेड की टीमों ने संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चलाया। रेस्क्यू के लिए 80 मजदूर, 5 जेसीबी, 3 वाटर सक्शन पंप, 1 क्रेन, 4 ट्रैक्टर-ट्रॉली और स्लैब काटने वाली मशीन लगाई गई। नाले का स्लैब तोड़ने के लिए रामपुर से विशेष मशीन मंगाई गई। सुरक्षा के कड़े इंतजाम मौके पर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1 सीओ, 2 इंस्पेक्टर, 10 सब-इंस्पेक्टर, 20 सिपाही और 15 ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात रहे। एक इंटरसेप्टर वाहन भी लगातार 30 घंटे तक मौके पर मौजूद रहा। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अपर नगर आयुक्त समेत तीन अधिकारियों को जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।।
बरेली से कपिल यादव
