बरेली। ब्रह्मपुरी की 166 वीं रामलीला मंचन में गुरु व्यास मुनेश्वर जी ने लीला से पूर्व वर्णन किया कि श्रीं रामजी अयोध्या से सबकी आज्ञा लेकर निकलते हैं राजा दशरथ की आज्ञानुसार श्रीराम लक्ष्मण सीताजी आर्य सुमंत के साथ रथ में सबसे पहले तमसा नदी पहुंचे, जो अयोध्या से 20 किमी दूर है। इसके बाद उन्होंने गोमती नदी पार की और प्रयागराज से 22 किलोमीटर दूर वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जो निषादराज गुह का राज्य था। वहां निषादराज ने उनका स्वागत किया। निषादराज गुह मछुआरों और नाविकों के राजा थे। वनवास के दौरान श्रीराम ने अपनी पहली रात उन्हीं के यहां बिताई। श्रृंगवेरपुर में एक वृक्ष हैं जहां बैठकर प्रभु ने निषादराज गुह से भेंट की थी वे रामजी के बाल सखा थे दोनों ने एक ही गुरुकुल में रहकर शिक्षा प्राप्त की थी। यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने केवट से रामजी को गंगा पार कराने को कहा था। पर केवट सकुचाते हुए कहते है कि
मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना॥ चरन कमल रज कहुं सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई॥
इस लीला के मंचन के दौरान नाव के साथ यात्रा निकाली गयी, जो नरसिंह मंदिर से चलकर मलूकपुर चौराहा, सौदागरान होकर, मस्जिद आला हज़रत से गुजरती हुई, कूंचा सीताराम, बड़ा बाज़ार, नीम की चढ़ाई होते हुए थाना किला के सामने साहूकारा तक पहुंची। रास्ते में जगह जगह रामभक्तो ने पुष्प वर्षा कर नाव यात्रा का भव्य स्वागत किया, जिसमें प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर, निकट आला हज़रत दरगाह पर अखंड भारत गौरव ट्रस्ट व नाथ नगरी के राजा सेवा समिति के सदस्यों द्वारा स्वागत व आरती की गयी।
उसके बाद साहूकारे की तुलसी गली में केवट संबाद की लीला का मंचन हुआ। प्रवक्ता विशाल मेहरोत्रा ने बताया कि कल लीला में ‘दशरथ मरण और चित्रकूट में भरत मिलाप की लीला का मंचन होगा’।
अध्यक्ष राजू मिश्रा ने सभी पदाधिकारियों व अतिथियों का स्वागत किया व आभार व्यक्त किया। सुरक्षा व्यवस्था के लिए भारी पुलिस बल, पी ए सी तैनात थी। शोभायात्रा में प्रभारी निरीक्षक किला, एस एस आई कोतवाली, बिहारीपुर चौकी इंचार्ज, मलूकपुर चौकी इंचार्ज ढाल की तरह आगे चल रहे थे।
