वाराणसी/लखनऊ – उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कथित भड़काऊ बयान की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यह प्रकरण उस समय सामने आया है जब सोशल मीडिया पर खड़गे के एक भाषण का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें धार्मिक संदर्भ—विशेषकर नमाज—का उल्लेख करते हुए कथित रूप से एक विशेष राजनीतिक विचारधारा और उससे जुड़े लोगों के प्रति आक्रामक भावनाएं व्यक्त किए जाने का आरोप है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता त्रिपाठी ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि ऐसे बयान समाज में वैमनस्य, द्वेष और अस्थिरता को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि यदि इस प्रकार की अभिव्यक्तियों पर समय रहते संज्ञान नहीं लिया गया, तो इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
पत्र में उल्लेखित लिंक के माध्यम से उपलब्ध वीडियो को आधार बनाते हुए त्रिपाठी ने निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका कहना है कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि द्वारा दिया गया बयान यदि समाज के किसी वर्ग में भय या असुरक्षा की भावना उत्पन्न करता है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय बन जाता है।
बताया जा रहा है कि खड़गे के उक्त बयान में लगभग यह भाव व्यक्त किया गया है कि धार्मिक कृत्यों के दौरान भी राजनीतिक विरोधियों के प्रति आक्रोश प्रकट किया जाना चाहिए, जिसे लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हालांकि, बयान के वास्तविक संदर्भ और पूर्ण भाषण की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के मामलों में त्वरित कार्रवाई से ही समाज में शांति, सौहार्द और कानून के प्रति विश्वास बना रह सकता है।
फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन चुका है, और अब निगाहें राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
