बरेली। चोरी के मोवाइल से साइबर ठगी करने वाले चार सदस्यों को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार करके बड़ा खुलासा किया है। आरोपी पश्चिम बंगाल और झारखंड के निवासी है। पुलिस लाइन स्थित सभागार मे गुरुवार को अपर पुलिस अधीक्षक अपराध मनीष सोनकर ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि साइबर पुलिस ने अंतर्राज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। साइबर पुलिस ठगी के मामले की विवेचना कर रही थी, जिसमें सामने आया कि ठगी करने के लिए चोरी के मोवाइल से कॉल की गई थी। एसपी क्राइम ने प्रेसवार्ता में बताया कि पकड़े गए आरोपी झारखंड और पश्चिम बंगाल के रहने वाले है। जांच में पता चला है कि गिरोह कई दिनों से बरेली में मौजूद था और मोबाइल चोरी की फिराक में था। एसपी क्राइम ने बताया कि ठगी के एक मामले की विवेचना के दौरान सामने आया कि वारदात में जिस मोबाइल का इस्तेमाल हुआ था, यह चोरी का था। इसके बाद साइबर पुलिस ने मामले की जांच की दिशा बदल दी और गहनता से तफ्तीश शुरू की। जांच में पता चला कि गिरोह मोबाइल चुराकर उसे साइबर ठगों को बेच रहा है। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से चार आरोपियों को रेलवे जंक्शन के पास से दबोच लिया। गिरफ्तार साइबर ठगों के पास से चोरी के 45 मोबाइल बरामद हुए हैं जिनकी कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी जा रही है। सभी मोबाइल अलग अलग इलाकों से चोरी हुए है। पुलिस बरामद मोबाइल फोन के बारे मे जानकारी जुटा रही है। सागर कुमार महाराजपुर, साहिबगंज, झारंखड सुमित कुमार, सुतियाल पाडा, साहिबगंज, झारखंड, आकाश नुनईया आसनसोल, पश्चिम बंगाल, त्रऋषि कुमार माहाराजपुर, साहिबगंज, झारखंड के बदमाशों की गिरफ्तारी हुई। पोर्ट कराते थे नंबर, ओटीपी से निकालते थे रुपये: यह गिरोह भीड़ वाली जगह पर सक्रिय रहता था। वहां मौका पाकर लोगों का मोबाइल चुरा लेता था। उसके बाद उस मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खाते से ओटीपी के जरिये रुपये निकाल लेता था। एसपी क्राइम ने बताया कि गिरोह मोबाइल चुराने के बाद पहले उसका सिम निकाल लेता था। उसे दूसरे फोन में लगाकर सिम पोर्ट करने के लिए ओटीपी हासिल कर लेते थे। पोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खातों से रुपये निकाल लेते थे। इसके लिए जिस व्यक्ति का मोबाइल होता था, उसकी यूपीआइ आइडी को ओटीपी के जरिए एक्टिव करते थे। यह गिरोह बरेली मे भी मोबाइल चोरी की कई वारदात कर चुका है।।
बरेली से कपिल यादव
