बरेली। पुलिस ने अपहृत ऑटो ड्राइवर मनोज और उसके दोनों बच्चे मयूर व लक्ष्य को बरामद कर लिया। मगर जब उन लोगों से पूछताछ की गई तो अपहरण का कोई खास मकसद सामने नही आया क्योंकि मनोज की पत्नी पूजा से फिरौती की डिमांड नही की गई थी। इसके बाद पुलिस ने गहराई से पूछताछ की तो रिश्तों की उलझी हुई कहानी सामने आई। पता चला कि हादसे मे मारा गया मुख्य आरोपी मनमोहन ऑटो ड्राइवर की मुंहबोली बेटी से शादी करना चाहता था। जिसको लेकर वह तैयार नही था। इसी वजह से इस पूरी वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस की जांच मे सामने आया कि मनमोहन और मनोज फरीदपुर के गांव टांडा सिकंदरपुर के रहने वाले है। मनमोहन, कोरी और मनोज, वाल्मीकि जाति का है। मनोज करीब सात-आठ साल से गुरुग्राम मे अपने परिवार के साथ रहता है। वह ऑटो चलाता है और उसकी पत्नी पूजा घरों मे काम करती है। मनोज की बड़ी बहन संगीता पिछले कई साल से पत्नी की तरह मनमोहन के पिता नत्थूलाल के साथ रहती है। कुछ समय पूर्व मनमोहन काम की तलाश में मनोज के पास पहुंचा तो उसने पानी सप्लाई कंपनी में ट्रैक्टर चलाने की नौकरी लगवा दी। कुछ समय वह मनोज के साथ ही रहा। इसी दौरान मनोज के साथ रहने वाली उसकी छोटी बहन की बेटी से मनमोहन के प्रेम संबंध हो गए। मनमोहन उससे शादी करने को कहने लगा लेकिन जातियां अलग होने के कारण मनोज तैयार नही था। वह अपनी बहन के नत्थूलाल के साथ रहने को लेकर ही नाराज था और फिर उसने अपनी मुंहबोली बेटी से भी इस शादी से इनकार कर दिया। इस पर मनमोहन और उसकी मुंहबोली बेटी अलग कमरा लेकर रहने लगे। मगर इसको लेकर उनके बीच मनमुटाव हो गया। आशंका जताई जा रही है कि इसी रंजिश के चलते मनमोहन ने उसका अपहरण कर लिया। बच्चों को देखकर बोला नत्थू, सबको ठिकाने लगा दो : मनमोहन अपने साथी सिकंदर, विशेष यादव और प्रिंस यादव के साथ मनोज व बच्चों का अपहरण करके फरीदपुर में अपने घर लेकर गया। हादसे में जीवित बचे इकलौते आरोपी प्रिंस ने बताया कि वहां पर मनमोहन के पिता नत्थूलाल ने बच्चों को लाने को लेकर काफी नाराजगी जताई। फंसने की बात कहते हुए उसने कहा कि तीनों को ठिकाने लगा दो, वह सब निपट लेगा। इसके चलते ही वे लोग बच्चों को गुरुग्राम छोड़ने जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। तमंचा सटाकर लाए फरीदपुर, बनाया बंधक : पुलिस की पूछताछ में मनोज ने बताया कि पिछले चार-पांच दिन से वह एक व्यक्ति को रोजाना सिकंदरपुर पहाड़ी के पास स्थित हनुमान मंदिर लेकर जाता था। चार अप्रैल को दोनों बेटे मयूर और लक्ष्य भी उसके साथ थे। इसी दौरान काली बोलेरो से आए चार व्यक्तियों ने उसका अपहरण कर लिया। मनोज को सीट पर बैठाकर तमंचा सटा दिया और बेटों समेत हत्या की धमकी दी। फरीदपुर लाकर मनमोहन के घर में उसे बंधक बना लिया। इस दौरान उसे नशा भी दिया जाता था और तीन-चार तालों में बंद करके रखा। आरोपी दोनों बेटों को गुरुग्राम छोड़ने की बात कहकर वापस ले गए। इसके बाद क्या हुआ, उसे कोई जानकारी नही।।
बरेली से कपिल यादव
