नई शर्तों के झंझट में फंसे परेशान गैस उपभोक्ता, मोबाइल भी बना बाधा

बरेली। जो उपभोक्ता खाली सिलेंडर के बदले भराना चाहते है। बुकिंग कराने के बाद भी गारंटी नही कि मिल ही जाए। कैश मेमो जेनरेट होते ही वितरक के सॉफ्टवेयर मे जांचा जाएगा कि उपभोक्ता ने ई-केवाईसी कराई है या नही। अब इसमे नई शर्त यह जोड़ी जा रही है कि उपभोक्ता के यहां सिलेंडर को चूल्हे से जोड़ने वाला पाइप किस अवस्था मे है। कही एक्सपायर तो नही हो गया। पहले इसको बदला जाएगा, इसके बाद ही आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए तेल कंपनियों को मौजूदा समय सबसे मुफीद लग रहा है क्योंकि गैस हासिल करना लोगों की मजबूरी में शामिल है। इस स्थिति में तेल कंपनियों ने ई-केवाईसी के बाद रबर पाइप जरूरी कर दिया है। सूत्रों के अनुसार उच्च स्तर से रीफिल आपूर्ति की निगरानी की जा रही है। जिस वितरक के यहां 70 फीसदी उपभोक्ताओं का केवाईसी हुआ है, उसे महीने की आपूर्ति उसी संख्या के अनुपात में की जा रही है। कुछ वितरकों के यहां तो आपूर्ति 60 फीसदी के आसपास रह गई है। वही जिले मे बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ता है जो साधारण हैंडसेट इस्तेमाल करते हैं। इसमें संदेश को एकत्रित रखने का स्थान बहुत जल्द भर जाता है। ऐसे उपभोक्ताओं के लिए भी तेल कंपनियों का यह फरमान मुश्किल भरा है। इनकी शिकायत यह है कि इनके पास बुकिंग का संदेश ही नही आता जबकि तेल कंपनियों का कहना है कि जैसे ही बुकिंग होती है। उसके बाद सभी जानकारी युक्त संदेश जा रहा। उपभोक्ता के बुकिंग कराते ही मैसेज जेनरेट होता है। उसमें कैश मेमो का विवरण होता है। साथ ही डिलीवरी ऑथंटिकेशन कोड रहता है। इस कोड के लिए खास निर्देश हैं। जब हॉकर पंजीकृत पते पर गैस रीफिल देगा तो उनकी वैधता की पुष्टि के लिए डीएसी नंबर की मांग की जाएगी। यह डीएसी रीफिल डिलीवरी के लिए दिए गए विकल्प में दर्ज करते ही डिलीवरी वास्तविक उपभोक्ता को होना मान लिया जाएगा।।

बरेली से कपिल यादव

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