बरेली- सरस्वती पुत्र शिक्षक पृथ्वी पर परिवार समाज व राष्ट्र के सबसे बड़े हितैषी होते हैं उक्त उदगार महापौर डाॅ. उमेश गौतम ने यथार्थ गीता दिव्य ज्ञान ट्रस्ट द्वारा आयोजित गुरु संदीपनि सम्मान में बरेली मंडल से पधारे शिक्षाविदों को ईनवर्टिंज के सिटी स्थिति सभागार में सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये। महापौर ने कहा शिक्षक चेतना का दूसरा अंश हैं पृथ्वी पर जो अपने ज्ञान रूपी दीपक से समाज को राह दिखाते हैं , उनका हमें सम्मान करना चाहिए।
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य पुष्पा पांडे ने कहा गीता ट्रस्ट के माध्यम से गुरु संदीपन पुरस्कार दिया जाना बहुत ही हर्ष का विषय है उन्होंने शिक्षा तथा समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जाने वाले शिक्षाविदों को हार्दिक बधाई भी प्रेषित की
कार्यक्रम के संयोजक ट्रस्ट के अध्यक्ष पण्डित हरिओम गौतम ने कहा भगवान कृष्ण के गुरु थे महर्षि संदीपनि, कृष्ण बलराम ने उज्जेन स्थिति गुरु संदीपनि आश्रम में जाकर शिक्षा ग्रहण की, गुरु ने उन्हें यज्ञोपवित् धारण कराया और मात्र 64 दिनों में 64 कलाओं की विद्या सिखाई,विद्या पूर्ण होने पर दक्षिणा के समय गुरु माता ने अपने एक मात्र पुत्र पुनरदत्त जो समुद्र में डूब गया था को जीवित लाने की बात कृष्ण के सामने रखी, भगवान कृष्ण ने योग माया से पाताल में जाकर गुरु पुत्र को काल के ग्रास से निकाल कर जीवित किया था।
शिक्षा विद लाल बहादुर गगवार ने कहा कि हिंदू नव वर्ष 2083 प्रारंभ हो रहा है मिलकर उसका स्वागत करें, मेयर जी के अथक प्रयासों से आज नाथ नगरी का कायाकल्प हो गया है चारो तरफ भगवन शंकर का डमरू बज रहा है बरेली आध्यात्मिक नगरी बन चुकी है हिंदुत्व संस्कृति का बोल बाला है माता और बहनें सुरक्षित हैं, मेयर की नई सोच है हमें उनका साथ देना चाहिए।
शिक्षाविद डा, सुभाष मोर्य ने गौतम ऋषि के विषय में प्रकाश डाला, महर्षि गौतम ने त्रियम्बकेश्वर् में भगवान शंकर के ज्योतिरीलिंग की स्थापना की, न्याय शास्त्र की रचना करने के कारण वे न्याय के देवता कहलाये,
महापोर् भी हमेशा न्याय संगत बात करते हैं,
आज उनके कर कमलो से सम्मान पाकर हम सब शिक्षाविद गदगद हैं,
कथा व्यास डा, आशुतोष शर्मा ने कहा महर्षि गौतम गायत्री साधक थे उनके एक पुत्र यज्ञ करते थे, जिनका नाम शतानंद था, शतानद मिथिला के राजा जनक के कुल गुरु थे,
आज उनकी ही परंपरा को पण्डित हरियोम गौतम आगे ले जा रहे हैं आत्मसात कर रहे है, इसलिए लोग इन्हें यज्ञ पुरुष कहने लगे हैं,
कथा व्यास ने महापोर् के कार्यों की भी प्रसंसा की,
शिक्षा विद इंद्र देव तृवेदी ने कविता के माध्यम से कहा
आज ईरसा , द्वेष से मनुष्य जल रहा है
आग न बुझती द्वेष की बरसे मेघ महान
भीष्म द्रोण दोनों थके
न दे पाए ज्ञान,
अंत में महापोर् ने अपने कर कमलों से सभी शिक्षा विदों को गुरु संदीपनि सम्मान समर्पित किया,
इस अवसर पर बेनिराम शर्मा, कृपाल सिंह, डा, योगेश शर्मा श्री मति नम्रता वर्मा, डा, पुरणिमा अनिल , राहुल यदुवंशी आदि मौजूद रहे, राज्य महिला आयोग की सदस्य पुष्पा पांडे ने भी विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम की आध्यक्षता कथा व्यास सतेंद्र मोहन शास्त्री ने की व संचालन डा, नितिन् सेठी ने किया इस दौरान गीता ट्रस्ट के राम बाबू वर्मा, विनोद गंगावर्, संतोष तिवारी, हरिश सूरी, अंबिका गौतम का सहयोग रहा।
