शाही, फतेहगंज पश्चिमी, बरेली। केंद्रीय कारागार-2 के कैदी की इलाज के दौरान मेरठ मे मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि साथ गए जेल स्टाफ ने इलाज कराने के बदले 60 हजार रुपये की मांग की। वे लोग रकम नही दे सके। जिसके चलते इलाज नही हुआ और मौत हो गई। इस संबंध में आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत कर कार्रवाई की मांग की गई है। शाही के गांव खरसैनी निवासी पुष्पा देवी की शादी फतेहगंज पश्चिमी के गांव मनकरी निवासी सत्यपाल से हुई है। हत्या के मामले मे सत्यपाल को आजीवन कारावास की सजा हुई है और करीब दो साल से वह केंद्रीय कारागार-2 मे बंद था। पुष्पा ने बताया कि शनिवार सुबह उन्हें जेल से फोन करके पति की तबीयत खराब है और उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया जा रहा है। इस पर वह अपने बेटे आकाश के साथ पति की तीमारदारी के लिए जिला अस्पताल पहुंच गई। हालत ज्यादा खराब होने पर डॉक्टरों ने सत्यपाल को मेरठ अस्पताल रेफर कर दिया। जेल की गारद के साथ ही उनका बेटा आकाश भी अपने पिता के साथ मेरठ गया। पुष्पा का आरोप है कि मेरठ पहुंचने पर आकाश से पुलिस वालों ने तुरंत इलाज शुरू होने को डॉक्टरों को 60 हजार रुपये देने की बात कही। वही पुष्पा का कहना है कि उनके बेटे ने 60 हजार रुपये मांगने की जानकारी दी तो उन्होंने प्रधान से साथ गए जेलकर्मी की बात कराई। जेलकर्मी ने प्रधान से इलाज के लिए यह देने की बात कही। जेलकर्मी ने समझाया कि जेल से बजट आने मे दो-तीन दिन का समय लगेगा। कैदी की हालत ठीक नही है। ऐसे मे परिवार 60 हजार रुपये खर्च कर दे जो बाद मे जेल प्रशासन से मिल जाएंगे। पुष्पा का आरोप है कि वे लोग इलाज के लिए 60 हजार रुपये नही दे सके। इस वजह से उनके पति का ठीक से इलाज नही हुआ और रविवार को उनकी मौत हो गई। इसको लेकर उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत कर कार्यवाही की मांग की है। जेल प्रशासन का कहना है कि किसी कैदी के बीमार होने पर अगर इलाज के लिए रकम की जरूरत होती है तो एस्टीमेट बनाकर जेल प्रशासन को भेजा जाता है। जेल से रकम अस्पताल को भेज दी जाती है। अगर जेल के पास बजट नहीं होता और इमरजेंसी है तो किसी अन्य मद से भी रकम का भुगतान किया जा सकता है। मगर जेल प्रशासन का कहना है कि इस मामले में मेरठ अस्पताल से उन्हें एस्टीमेट ही नहीं भेजा गया।।
बरेली से कपिल यादव
