छह सैंपल की होगी जांच, तीन दिन मे संचालक से मांगा जवाब

बरेली। हरूनगला मे बड़े पैमाने एक गोदाम मे अवैध खाद भंडारण के मामले मे कृषि विभाग की कार्यशैली कटघरे में है। शहर के बीचो-बीच बिना लाइसेस और बिना किसी मशीन के अंधाधुंध तरीके से खाद की पैकिंग का यह खेल महीनों से बल रहा था लेकिन हैरानी की बात है कि जिस विभाग पर खाद की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी है। उसे इसकी भनक तक नही थी। सोमवार को पूरे दिन इसको लेकर चर्चा रही। रविवार को कृषि विभाग की टीम ने गोदाम पर छापा मारा था। पकड़े गए आरोपी सुरेंद्र और उसके साथी जिस बेतरतीब तरीके से माइक्रो न्यूट्रिएंट, एमओपी, फेरस सल्फेट की अंधाधुंध पैकिंग कर रहे थे। वे सौधे तौर पर किसानों की फसल और मिड्री की सेहत से खिलवाड़ है। बरेली से मुरादाबाद तक फैले इस नेटवर्क के पीछे विभाग के ही कुछ भेदियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। सवाल उठ रहा है कि जब गोदाम स्वामी के पास न कोई बिल था और न कोई इनवाइस, तो आखिर ये खाद के ट्रक किन रास्तों से और किसकी अनुमति से गुजर रहे थे। गोदाम से मिली सामग्री और पैकिंग के तरीके ही के देखकर साफ है कि यह काम किसी अनाड़ी का नही बल्कि एक संगठित सिंडिकेट का है। चर्चा है कि कुछ रसूखदार मामले को दबाने और साक्ष्यों से छेड़‌छाड़ की जुगत मे लगे है। यदि निष्पक्ष जांच कराई गई तो पूरा खेल उजागर हो जाएगा। जिला कृषि अधिकारी ऋतुषा तिवारी का कहना है कि फिलहाल गोदाम स्वामी को नोटिस जारी कर तीन दिन मे जबाव मांगा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक उत्तर न मिलने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। कृषि विशेषज्ञ विजय चौहान बताते हैं कि जिस खाद को बनाने के लिए वैज्ञानिक मानकों और भारी मशीनों की जरूरत होती है, उसे हरूनगला के एक साधारण गोदाम में ‘बेतरतीब तरीके से पैक किया जा रहा था। आरोपी न केवल विल दिखाने में नाकाम रहे. बल्कि उनके पास कारोबार का कोई भी कानूनी दस्तावेज नहीं था। सूत्रों का दावा है कि खाद की यह सप्लाई सीधे तौर पर उन किसानों तक पहुंचाई जा रही थी जो ब्रांड के नाम पर जहर खरीद रहे थे।।

बरेली से कपिल यादव

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