राजस्थान/बाड़मेर- आपके आसपास में कोई भी व्यक्ति नशे का काला कारोबार कर रहा है, जो आगामी चुनावों के लिए नशे की खेप मगवाकर आने वाली युवा पीढ़ीयों को बर्बाद करने पर तुला हुआ है और अगर आप हमारे साथ जानकारी साझा करते हैं तो सोने पे सुहागा, एएनटीएफ और एटीएस के महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि अतिरिक्त महानिदेशक दिनेश एम.एन. के मार्गदर्शन में नशे के खिलाफ यह मुहिम जारी रहेगी और इस ऑपरेशन में शामिल टीम को जल्द सम्मानित किया जाएगा। अगर आपके आसपास किसी अपराधी या नशे के कारोबार की जानकारी हो तो एएनटीएफ के नंबर 0141-2502877 या व्हाट्सएप 9001999070 पर सूचना दे सकते हैं। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
विकास कुमार ने बताया कि बेरोजगारी से त्रस्त होकर लोकोपायलट बनने का सपना देखने वाला एक युवक कब शराब तस्कर बना और कब एमडी ड्रग की फैक्ट्री लगाने की जुगत में लग गया, शायद उसे खुद भी पता न चला। लेकिन चौहटन थाना क्षेत्र के बावड़ी गांव के सुनसान धोरों में जहरीला नशे की यह फैक्ट्री परवान चढ़ पाती, उससे पहले ही एएनटीएफ ने छापा मारकर सारा खेल ही बिगाड़ दिया।
विकास कुमार ने बताया कि बाड़मेर एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) को सूचना मिली थी कि बावड़ी गांव के सुनसान इलाके में एक बंद कमरे में सिंथेटिक नशे की लैब चल रही है। टीम ने जब मौके पर पहुंचकर तस्दीक की तो धोरों के बीच एक टीन टप्पर शेड वाला कच्चा कमरा नजर आया। बाहर केमिकल के ड्रम, उपकरण और कई गाड़ियों के आने-जाने के निशान सब कुछ संदेह पक्का करने के लिए काफी था।
बाड़मेर इन्चार्ज महिपाल सिंह के नेतृत्व में टीम ने कमरे को चारों तरफ से घेर लिया। अंदर से एक शख्स ने भागने की कोशिश की, लेकिन बच नहीं पाया। पकड़ा गया 26 साल का भगाराम, जो रोड़ियों का तला, बावड़ी कला का रहने वाला है।भगाराम की कहानी उन हजारों युवाओं जैसी है जो गलत संगत में पड़कर अपना रास्ता भटक जाते हैं। दसवीं और आईटीआई करने के बाद वो लोको पायलट बनने की तैयारी में जुटा था। लेकिन एक दोस्त की शादी में मुलाकात हुई शराब तस्कर बाबुलाल से और वहीं से शुरू हुआ पतन का सिलसिला।
बाबुलाल के ट्रक पर खलासी बनकर हरियाणा से राजस्थान होते हुए गुजरात तक शराब पहुंचाने लगा भगाराम। हर चक्कर पर दस से पंद्रह हजार रुपये पैसे अच्छे थे, लेकिन रास्ता पूरा ही गलत था। गुजरात पुलिस की पकड़ में आया और जेल नसीब हुई। जेल में मिला एक और शराब तस्कर शैलेष वहा से बाहर आने पर फिर वही धंधा, और इस बार गुजरात के कई जिलों में छह मुकदमे और दर्ज हो गए। पुलिस का शिकंजा कसा तो फरार हो गया। बुरा वक्त के दौरान कोई साथ नहीं मिला वैसे ही फरारी में साथ छोड़ गए सब। काम नहीं, पैसे नहीं। घर चलाने के लिए पत्नी के गहने तक बेचने पड़े। जब वो भी खत्म हो गए तो पुराने साथी करीम से पचास हजार उधार लिए और करीम ने एमडी फैक्ट्री लगाने का “आइडिया” दे दिया और भगाराम मान गया। करीब दस-पंद्रह दिन पहले भगाराम ने अपने खेत के टीन शेड में केमिकल और उपकरण जमा कर लिए थे। एमडी बनाने की तैयारी शुरुआती दौर में ही थी कि एएनटीएफ ने दबिश दे दी। बरामद हुआ एमएसएल (मिथाइल सल्फो मीथेन), टोलविन, एचसीएल और कास्टिक सोडा। अधिकारियों के मुताबिक अगर यह फैक्ट्री चल जाती तो महज पंद्रह दिन में करीब 18 करोड़ रुपये की एमडी तैयार हो जाती और साठ हजार लोग इसकी गिरफ्त में आ सकते थे।
विकास कुमार ने कहा कि रेतीले धोरों में यह कोई पहली बड़ी घटना नहीं है। जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर खासकर पश्चिमी राजस्थान के ये जिले पिछले कई सालों से सिंथेटिक नशे के गढ़ बनते जा रहे हैं। पहले तस्कर बाहर से माल लाते थे, अब मुनाफा बढ़ाने के लिए यहीं धोरों की आड़ में अवैध रूप से नशे की फैक्ट्रियां लगा रहे हैं जो पहले किसी न किसी रूप मे नशे की काला धन्धे में अपने आप को शामिल कर चुके हैं।
— राजस्थान से राजूचारण
