बरेली। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष पर चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव चुनाव हारने पर ईवीएम और चुनाव आयोग को बदनाम करने लगते हैं। चुनाव जीतने पर अपनी योग्यता का दावा करते हैं और हारने पर व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र देश के नागरिक चलाएंगे, घुसपैठिए नहीं। घुसपैठियों के पक्ष में खड़े होने वालों को जनता नकार देगी। वह मंगलवार को बरेली में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे। जेपी नड्डा ने कहा कि भारत को दुनिया में लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट ने वर्षों की मेहनत से अपनी प्रतिष्ठा बनाई है, लेकिन इंडी गठबंधन के नेता चुनाव आयोग के प्रति लोगों के विश्वास को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने गुजरात के गिर के जंगल में एक मतदाता का वोट डलवाने के लिए दस कर्मचारियों को दस किलोमीटर पैदल भेजा। इसी तरह अरुणाचल प्रदेश में एक मतदाता तक पहुंचने के लिए कर्मचारियों ने पहाड़ों में 44 किलोमीटर का सफर किया। चुनाव आयोग की यही व्यवस्था है कि मतदाता को आयोग के दरवाजे पर नहीं आना पड़ेगा, बल्कि आयोग उसके दरवाजे तक पहुंचेगा। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का समर्थन करते हुए नड्डा ने कहा कि देश में यह प्रक्रिया 12 बार हो चुकी है। इनमें दस बार कांग्रेस और दो बार एनडीए के शासनकाल में हुई। नड्डा ने पश्चिम बंगाल के बांग्लादेश से सटे नौ जिलों में वर्ष 2004 से 2024 के बीच मतदाताओं की संख्या में वृद्धि का दावा किया। उन्होंने उत्तर दिनाजपुर में 105 प्रतिशत, मालदा में 94 प्रतिशत, मुर्शिदाबाद में 87 प्रतिशत, दक्षिण 24 परगना में 83 प्रतिशत और जलपाईगुड़ी में 82 प्रतिशत वृद्धि का आंकड़ा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ के कारण मतदाता संख्या बढ़ी है। हालांकि ये आंकड़े और वृद्धि के कारणों को लेकर उनके दावे थे। कांग्रेस पर हमला बोलते हुए नड्डा ने कहा कि राहुल गांधी लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन उनकी दादी इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान करीब 1.30 लाख लोगों को जेल में डाल दिया था। उन्होंने दावा किया कि उन्हें भी आपातकाल के दौरान दो बार कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कांग्रेस पर चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त करने और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। सरदार पटेल के बजाय जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के घटनाक्रम को भी उन्होंने वोट चोरी से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। नड्डा ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने ईवीएम को हैक करने की चुनौती दी थी, लेकिन कांग्रेस और सपा के नेता इसे स्वीकार करने नहीं पहुंचे। उन्होंने राहुल गांधी के कर्नाटक के महादेवपुरा में एक लाख वोट कटने के आरोप का जिक्र करते हुए कहा कि 450 दिन बीतने के बाद भी चुनाव आयोग को शपथपत्र नहीं दिया गया। हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में धांधली के आरोपों पर भी उन्होंने विपक्ष से प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि 2023 में बनाए गए कानून के तहत चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया गया। इससे पहले के चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों के बाद उन्हें अन्य सरकारी पद दिए जाने के उदाहरण गिनाते हुए उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।।
बरेली से कपिल यादव
