नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर २ अक्टूबर को हिबा ग्रीन फाउंडेशन ने यमुना चौपाल में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक विशेष पहल में भाग लिया। ग्रीन पेंसिल फाउंडेशन और अर्थ वॉरियर फाउंडेशन के संयुक्त आयोजन में विभिन्न महाविद्यालयों के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यमुना नदी के आसपास फैले कचरे की सफाई करना, युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत पदयात्रा से हुई, जिसमें युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश दिया। इसके बाद सभी प्रतिभागियों ने मिलकर यमुना के आसपास फैले कचरे को एकत्रित किया और उसे एक स्थान पर जमा किया। इस सामूहिक प्रयास के माध्यम से युवाओं ने यह संदेश दिया कि नदियों को स्वच्छ रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
अभियान के दौरान हिबा ग्रीन फाउंडेशन की संस्थापक हिबा खान ने स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों से व्यक्तिगत रूप से संवाद किया। उन्होंने युवाओं से उनके विचारों, पर्यावरण के प्रति उनकी समझ और सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी को लेकर बातचीत की। साथ ही, विद्यार्थियों के साक्षात्कार भी लिए गए, जिनमें उन्होंने अपने अनुभव और भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर विचार साझा किए।
इस अवसर पर हिबा खान ने अपनी पुस्तकों के माध्यम से उपस्थित लोगों को पर्यावरण, सामाजिक असमानता और मानवीय जिम्मेदारियों से जुड़े विषयों से भी परिचित कराया। उन्होंने अपनी पुस्तकों ‘गरम रोटी – फाँसी का फंदा’, ‘क्लाइमेट एक्शंस इन एवरीडे लाइफ’ और ‘दूध का रंग सफेद नहीं, लाल है’ के बारे में जानकारी साझा की। इन पुस्तकों के माध्यम से उन्होंने महिला श्रम, जलवायु परिवर्तन, पशु कल्याण और हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली के पर्यावरणीय प्रभावों जैसे विषयों पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान हिबा खान ने ग्रीन पेंसिल फाउंडेशन के संस्थापक सैंडी कांडा और अर्थ वॉरियर फाउंडेशन के संस्थापक पंकज कुमार को अपनी पुस्तकें भेंट कीं। यह भेंट पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में साझा प्रयासों तथा वैचारिक सहयोग का प्रतीक रही।
गांधी जयंती के इस अवसर पर आयोजित यह पहल केवल सफाई अभियान तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं के साथ संवाद, विचारों के आदान-प्रदान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी बनी।
हिबा ग्रीन फाउंडेशन का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली सामूहिक जिम्मेदारी है। यमुना के तट पर युवाओं की यह सहभागिता इसी सोच को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास रही।
गांधी जयंती पर यमुना तट की सफाई के लिए एकजुट हुए युवा, हिबा ग्रीन फाउंडेशन ने निभाई सक्रिय भूमिका
