बाड़मेर में बिजली पानी और सड़कों की आड़ में चमकेगी बिखरी हुई राजनीति

राजस्थान/बाड़मेर- बाड़मेर जिले में राजनीति करना आजकल वो एक फुटबॉल का मैदान है कोई भी आकर सीधा गोल मारोगे तो फिर विजय पताका फहराने से कोई नहीं रोक सकता है लेकिन ये सब असन्तुष्ट मतदाताओ पर निर्भर करता है कि किसकी किस्मत में चार चांद लगाकर राजयोग की कुर्सी मिलेगी।

वातानुकूलित कमरों में बैठकर मूलभूत समस्याओं का समाधान करने की बनाई गई योजनाओं को धरातल पर लागू करने में कितने दशक चले गए लेकिन बाड़मेर शहर आज भी अपने उधड़े हुए शहर जैसा नज़र आ रहा है‌।इसके लिए आपको विकास का चश्मा लगाने की जरूरत है चश्मा उतारो तो फिर जगह जगह पर चहुओर….

बाड़मेर में नहरी जल संकट के स्थायी समाधान के लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ प्रशासनिक दूरदर्शिता की सख्त आवश्यकता है हर साल होने वाली सरकारी नहरबंदी की रोकथाम करने के लिए हमारे जलदाय विभाग और उनके अधिकारियों द्वारा धरातल पर क्या काम किया गया है लेकिन लोगो की नज़र में कुछ बेहतरीन किया गया है तो फिर तीन चार महीने तक बाड़मेर शहर में जल माफिया मालामाल और शहरी सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जागरूक मतदाता पिसते क्यों है जहाँ देखोगे वही विरोध होता है और महिलाओं द्वारा मटके फोड़ कर विरोध दर्ज करवाया जाता है।

इस बात में जनता की उस गहरी हताशा और दर्द की झलक है जो बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर बिजली पानी जैसी जीवन रक्षक चीज़ की कमी से पैदा होती है, यह बिल्कुल सच है कि सरकारों और राजनीतिक दलों के बीच आरोप- प्रत्यारोप का दौर चलता रहता है, लेकिन इसका सीधा और सबसे गंभीर असर बाड़मेर शहर में आम नागरिकों के जीवन पर पड़ता है।

मूलभूत समस्याओं से केवल ग्रामीण इलाकों के लोग ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों के लोग भी जूझ रहे हैं। जिस तेजी से शहरों के आसपास आबादी बढ़ी है, उस लिहाज से मूलभूत सुविधाओं का हमारे नेताओं द्वारा विस्तार नहीं किया जा सका है। किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का भी इन पर कोई ध्यान नहीं होता है। गावों और शहरों में आजकल एक बात चर्चा का कारण है कि सरकारी कार्यालयों के अधिकारियों को अपनी जेब कटवाना नहीं बल्कि जेब का भार बढ़ाने पर विश्वास रखते हैं। ओर इनकी कृपालु दृष्टि से ही गावों और शहर में लगातार मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं करने की सरकारी कार्यालयों में बड़े बड़े नेताओं के बाड़मेर आगमन पर अपनी मांग पत्र सौपने की दिनों दिन बाढ़ आ रही है।

बाड़मेर जैसलमेर जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं का अग्रेजी शासन की गुलामी से छुटकारा पाने के साथ ही नव राजस्थान राज्य का निर्माण हुआ और तब से ही हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में जगह जगह पर सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होने से आमजन भारी अभावों में जीवन जी रहे है। हर बार शहरी क्षेत्रों और गावों में होने वाले चुनावों में मतदाताओं द्वारा इस उम्मीद से वोट डालते हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान इस बार जरूर हो जाएगा, लेकिन चुनाव दर चुनाव बीतते गए, उनकी मूलभूत समस्याएं ज्यों की त्यों बरकरार रहीं। अब तो राज्य और देश में भी डबल इंजन की सरकार बन गई है।

अब तो पिछड़े हुए बाड़मेर जिले में लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों की मांग, उत्तरलाई हवाई अड्डे से आम आदमी के लिए सस्ती हवाई सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ ही बाड़मेर नगर परिषद की सीमा क्षेत्र में शहरीकरण का विस्तार, पुलिस थाने रिको एरिया में दानजी की होदी क्षेत्र में नयी पुलिस चौकी, देवाधिदेव महादेव और इन्द्र की कृपा से थोड़ी सी बरसात आने के साथ ही जलभराव और साधारण लोगों को सबसे ज्यादा बारिश के दौरान ही शहर की निचली बस्तियाँ में जलभराव की चिंता रहती है और वो भी महिनों तक वहाँ के लोगों का शहर से जुडा़व कट जाता है और बिजली का चौबीस घंटे में चालीस बार जाना,वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलने से पहले ही सरकारी अधिकारियों की आखों का सूखते पानी और बाड़मेर शहर की सरकारी मशीनरी के आवागमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली जिला कलेक्टर आवास से लेकर चारण छात्रावास तक चमचमाती हुईं आधुनिक युग वाली सड़कों की जगह पर गड्ढो में तबदील सड़कों की बदहाली सहित कई अन्य समस्याओं का समाधान तो फिर रामभरोसे कहें तो फिर कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

— राजस्थान से राजूचारण

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