* छात्रों ने लिया व्यक्तिगत बदलाव का संकल्प
हापुड़: जलवायु परिवर्तन आज केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य, पानी, भोजन, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा बन चुका है। इसी महत्वपूर्ण विषय पर विद्यार्थियों में जागरूकता और ज़िम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से हिबा ग्रीन फाउंडेशन द्वारा दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), हापुड़ में कक्षा 10 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष जलवायु परिवर्तन एवं जलवायु कार्रवाई पर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।
सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल जलवायु परिवर्तन की परिभाषा समझाना नहीं, बल्कि उन्हें यह अवगत कराना था कि पर्यावरणीय बदलाव उनके अपने जीवन से किस प्रकार जुड़े हुए हैं और एक विद्यार्थी व्यक्तिगत स्तर पर इसमें क्या भूमिका निभा सकता है।
सत्र के दौरान विद्यार्थियों से जलवायु परिवर्तन, मौसम और जलवायु के बीच अंतर, बढ़ते तापमान, पानी की कमी, अत्यधिक गर्मी, अनियमित वर्षा और जलवायु परिवर्तन के सामाजिक प्रभावों पर बातचीत की गई। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव समाज के हर वर्ग पर समान नहीं पड़ता और कमज़ोर तथा संवेदनशील समुदायों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।
कार्यक्रम में ग्रीनहाउस गैसें, जैसे मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड के हानिकारक प्रभावों के विषयों को भी सरल भाषा और उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड से कम मात्रा में होने के बावजूद भी वातावरण को गर्म करने की क्षमता के मामले में अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है। इस तरह वैज्ञानिक विषयों को रोजमर्रा की ज़िन्दगी से जोड़कर विद्यार्थियों के लिए समझने योग्य बनाया गया।
सत्र को केवल एकतरफा लेक्चर न रखते हुए विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। विद्यार्थियों ने सवाल पूछे, अपने विचार साझा किए और यह चर्चा की कि जलवायु कार्रवाई की ज़िम्मेदारी केवल सरकारों या बड़ी कंपनियों की नहीं, बल्कि समाज और प्रत्येक व्यक्ति की भी है।
इस दौरान विद्यार्थियों को अलग-अलग पर्यावरणीय चुनौतियाँ पर सोचने और उनके व्यावहारिक समाधान सुझाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। उन्होंने पानी और बिजली की बचत, कचरा और प्रस्टिक प्रबन्धन के कम उपयोग, पेड़ों की सुरक्षा और जलवायु जागरूकता जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
सत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह रहा जब विद्यार्थियों से पूछा गया कि “जलवायु परिवर्तन के लिए मैं व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर सकता/सकती हूं?”
विद्यार्थियों ने अपने स्तर पर छोटे लेकिन व्यावहारिक बदलाव लाने का संकल्प लिया। इनमें अनावश्यक बिजली और पानी की बर्बादी रोकना, पशु सम्बंधित भोजन को कम करना, एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करना, पर्यावरण के प्रति दूसरों को जागरूक करना, पेड़ों की देखभाल करना और अपने दैनिक जीवन में अधिक ज़िम्मेदार विकल्प अपनाना शामिल रहा।
हिबा ग्रीन फाउंडेशन का मानना है कि जलवायु कार्रवाई केवल बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे व्यक्तिगत निर्णयों और सामूहिक जिम्मेदारी से मजबूत होता है। फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे जलवायु कार्रवाई, वनीकरण, सततता शिक्षा, लैंगिक समावेशन और सामुदायिक कल्याण से जुड़े प्रयास इसी सोच को आगे बढ़ाते हैं।
इस अवसर पर विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि युवा केवल जलवायु परिवर्तन के बारे में सुनना नहीं चाहते, बल्कि वे इसका हिस्सा बनकर समाधान खोजने और बदलाव लाने के लिए भी तैयार हैं।
कार्यक्रम का मूल संदेश स्पष्ट था—
“जलवायु परिवर्तन की चुनौती बड़ी है, लेकिन बदलाव की शुरुआत छोटी हो सकती है—और वह शुरुआत हम अपने आप से कर सकते हैं।”
हिबा ग्रीन फाउंडेशन का उद्देश्य ऐसे संवादों के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल जागरूक करना नहीं, बल्कि उन्हें जलवायु के प्रति जागरूक नागरिक और ज़िम्मेदार भविष्य के नेता के रूप में तैयार करना है।
