बरेली। संसद के मानसून सत्र में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) के छात्रों के हितों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा जोर-शोर से उठा। रुहेलखंड क्षेत्र की आंवला-बरेली लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में इस विषय को मजबूती से उठाते हुए केंद्र सरकार से कई तीखे सवाल किए। हालांकि, सरकार के जवाब से यह स्पष्ट हुआ कि ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत दाखिलों को लेकर सरकार के पास जिलावार कोई ठोस आंकड़े मौजूद नही है। सांसद नीरज मौर्य ने देश के शैक्षणिक संस्थानों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत आरक्षण, प्रवेश प्रक्रिया और निगरानी तंत्र को लेकर सवाल पूछे थे। उन्होंने विशेष रूप से रुहेलखंड और पश्चिमी यूपी के मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद के आंकड़े मांगे। सरकार की ओर से दिए गए उत्तर में शिक्षा को ‘समवर्ती सूची’ का विषय बताते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता का हवाला दिया गया। सरकार ने राज्यवार अथवा जिलावार रिक्त सीटों, वास्तविक प्रवेशों और निगरानी व्यवस्था का कोई स्पष्ट एवं पारदर्शी विवरण उपलब्ध नहीं कराया। निजी एवं गैर-सरकारी संस्थानों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के प्रभावी अनुपालन पर सरकार के गोलमोल जवाब को लेकर सांसद नीरज मौर्य ने असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार गरीब छात्रों के लिए बजट और आरक्षण का दावा करती है, तो यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि पात्र छात्रों को वास्तव में उनके अधिकार की सीटें मिल रही हैं या नहीं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए एक प्रभावी निगरानी तंत्र (Monitoring System) विकसित किया जाए, ताकि योजना का लाभ जमीनी स्तर पर जरूरतमंद विद्यार्थियों तक पहुंच सके।।
बरेली से कपिल यादव
