बरेली। 25 जून का दिन एक खूबसूरत महासंयोग लेकर आ रहा है। इस दिन ना सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा बल्कि गायत्री जयंती भी मनाई जाएंगी। निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों में से सबसे खास और पावरफुल माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है और लोग निर्जला व्रत रखते हैं। वहीं गायत्री जयंती मां गायत्री और गायत्री मंत्र की महिमा से जुड़ी हुई है। इस वर्ष निर्जला एकादशी व्रत गुरुवार 25 जून को विशेष औदायिक योग में मनाया जाएगा। इस दिन जल से स्नान और आचमन के अतिरिक्त कुछ भी ग्रहण नही किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम पांडेय का कहना है कि एकादशी व्रत का मुख्य उद्देश्य मन और इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त करना है। इससे आध्यात्मिक क्षेत्र में प्रगति होती है। निर्जला एकादशी के दिन बिना जल पीये उपवास रखने का विधान हैं। यदि व्रत नहीं रख सकते हैं तो दूध या दूध से बने उत्पादों का ही सेवन करें। बताया कि 25 जून को सूर्योदय 05:13 बजे और शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का मान संपूर्ण दिन रात को 09:14 बजे तक रहेगा। निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे कठिन व्रत माना जाता है। इस दिन लोग बिना कुछ खाए पिए व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस दिन मन से कई गई पूजा का खूब पुण्य मिलता है। कोशिश करनी चाहिए कि इस दिन व्रत रखा जाए क्योंकि इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। हालांकि जो लोग व्रत ना रख पाएं वो कुछ आसान उपायों से भगवान की कृपा पा सकते है। गायत्री जयंती पर मां गायत्री की पूजा-अर्चना करने से जिंदगी में सकारात्मकता आती है। मान्यता है कि इस दिन गायत्री मंत्र का जाप करना बेहद शुभ होता है। इस दिन गायत्री मंत्र का 108 बार जाप जरूर करना चाहिए क्योंकि इससे मन शांत रहता है और तनाव कम होता है। इसी के साथ जिंदगी से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।।
बरेली से कपिल यादव
