बरेली। नवनिर्मित प्राथमिक विद्यालय जोगीठेर में शिक्षा को रोचक और प्रेरणादायक बनाने की एक अनोखी पहल शुरू की गई है। यहां अब कक्षाओं के नाम देश के दो महान बाल साहित्यकारों और शिक्षाविदों—निरंकार देव सेवक और गिजुभाई बधेका—के नाम पर रखे गए हैं।
बच्चों को किताबों से जोड़ने की नई पहल
विद्यालय के प्रधानाध्यापक और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक लाल बहादुर गंगवार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सिर्फ पढ़ाई तक सीमित न रखकर उन्हें महान साहित्यकारों और शिक्षाविदों के जीवन व विचारों से जोड़ना है। निरंकार देव सेवक की कविताएं जैसे “रानी बिटिया चली घूमने”, “लाल टमाटर”, “पैसा पास होता तो”, और “तरह-तरह के फूल खिले” आज भी बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में शामिल हैं और बेहद पसंद की जाती हैं।
“बच्चों के गांधी” से सीखने का मौका
गुजरात के महान शिक्षाविद गिजुभाई बधेका, जिन्हें “बच्चों के गांधी” कहा जाता है, ने बाल शिक्षा को सरल, सहज और आनंदमय बनाने के लिए जीवनभर काम किया। अब उनके नाम से जुड़ी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे उनके विचारों से सीधे प्रेरणा ले सकेंगे।
क्यों खास है यह पहल?
प्रधानाध्यापक लाल बहादुर गंगवार के अनुसार, समाज में कई ऐसे महान लोग हुए जिन्होंने शिक्षा और साहित्य में बड़ा योगदान दिया, लेकिन बच्चे उनके बारे में जान नहीं पाते। इस पहल से न केवल उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है, बल्कि बच्चों को उनके साहित्य और विचारों से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है।
शिक्षा अधिकारियों ने की सराहना
इस नवाचार की सराहना सहायक शिक्षा निदेशक डॉ अजीत कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ विनीता और खंड शिक्षा अधिकारी पूरन सिंह ने भी की है। गौरतलब है कि इस नवनिर्मित विद्यालय का उद्घाटन जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल द्वारा किया गया था। यह पहल न सिर्फ स्कूल की पहचान बदल रही है, बल्कि बच्चों के भीतर साहित्य, संस्कृति और महान व्यक्तित्वों के प्रति जिज्ञासा भी जगा रही है—यानी अब क्लासरूम सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बल्कि प्रेरणा का केंद्र बन रहे हैं।
