बरेली। केंद्रीय बजट 2026 को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों में तीखी नाराजगी देखने को मिल रही है। सांसद से लेकर राजनीतिक दलों और कर्मचारी संगठनों तक ने इस बजट को दिशाहीन, आम जनमानस से दूर और सिर्फ अमीरों के हित में बना हुआ करार दिया है। आंवला के सपा सांसद नीरज मौर्य ने बताया कि आम बजट में सरकार ने उत्तर प्रदेश जैसे देश के बड़े राज्य पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। यह इतना बड़ा राज्य है कि यहां किसान, मजदूर और गरीब बड़ी संख्या में रहते हैं। उनके लिए कोई योजना नहीं बनाई गई, उनके लिए कुछ भी नहीं किया गया और उनका जिक्र तक नहीं हुआ। हमें लगता है कि देश के गरीब, कमजोर और आम लोग निराश हुए हैं। सभी लोग देख सकते हैं कि शेयर बाजार धराशायी हो गया है और कमोडिटी बाजारों को भारी नुकसान हुआ है। इस बजट में आम जनमानस के लिए कोई राहत नही दी गई है। पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि विदेशी इन्वेस्टमेंट के नाम पर देश की अर्थव्यवस्था को विदेशी कंपनियों के सामाने परोसा जा रहा है। इस बजट में माध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए कुछ भी नहीं है। सपा के महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी ने कहा कि बजट में बड़े-बड़े ऐलान किए गए, लेकिन आम आदमी, किसान, युवाओं और मध्यम वर्ग का का ध्यान नहीं दिया गया है। यह बजट कॉर्पोरेट परस्त और जनविरोधी है। सपा के प्रदेश प्रवक्ता मुहम्मद साजिद ने बजट को लेकर केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह बजट आम जनता के लिए नहीं बल्कि सिर्फ 5 प्रतिशत अमीर वर्ग के फायदे के लिए तैयार किया गया है। साजिद ने कहा “सरकार वोट गरीब, किसान और मिडिल क्लास से लेती है, लेकिन बजट बड़े उद्योगपतियों के लिए बनाती है। महंगाई, शिक्षा और रोजगार पर कोई ठोस योजना नहीं है।”उन्होंने सवाल उठाया कि जब बुनियादी ढांचा ही कमजोर है तो AI और हाईटेक दावों से आम आदमी को क्या मिलेगा? सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। बीज, खाद, डीज़ल और सिंचाई की लागत तीन गुना हो चुकी है, लेकिन किसान की आय नहीं बढ़ी। उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में 1.25 लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की, फिर भी सरकार किसान कल्याण के दावे कर रही है। कर्मचारी कल्याण सेवा समिति बरेली कॉलेज के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा ने भी बजट को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि मजदूरों और किसानों के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाए जाने की पुरानी मांग को भी बजट में नजरअंदाज कर दिया गया। जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि बजट के तुरंत बाद शेयर बाजार गिरा और निवेशकों के करीब 16 लाख करोड़ रुपये डूब गए, वहीं सोना-चांदी के दाम भी गिरने लगे है। न उन्होंने सरकार से खाली पड़े पदों को भरने और नए केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की मांग की। विपक्ष और सामाजिक संगठनों का साफ कहना है कि“यह बजट न किसान का है, न युवा का, न गरीब का यह बजट सिर्फ सरकार के चंद उद्योगपति मित्रों के लिए है।।
बरेली से कपिल यादव
