बरेली। रिपोर्ट मे बच्चों मे बढ़ते डिजिटल व्यसन पर भी चिंता प्रकट की गई है। डिजिटल व्यसन ने तात्पर्य सोशल मीडिया, मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल व्यसन लगातार विचलन नींद की कमी और कम एकाग्रता के कारण शैक्षणिक प्रदर्शन और कार्यस्थल की उत्पादकता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है। यह सामाजिक पूंजी को भी कमजोर कर रहा है। युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य मे आई गिरावट और डिजिटल व्यसन के बीच निकट संबंध है। विविध भारतीय एवं वैश्विक अध्ययनों ने 15-24 वर्ष के युवाओं में सोशल मीडिया के बढ़ते व्यसन की पुष्टि की है। सोशल मीडिया के व्यसन का जुड़ाव घबराहट, अवसाद, आत्मविश्वास में कमी और साइबरबुलिंग से उपजे दबाव के साथ भी है। भारतीय युवाओं को परेशान करने वाली अन्य समस्याओं में कंपल्सिव स्क्रॉलिंग, सामाजिक तुलना और गेमिंग से जुड़ी विकृतियां शामिल हैं। ये समस्याएं किशोरों मे नींद की कमी, आक्रामकता, सामाजिकता में कमी और अवसाद को जन्म देती है। रिपोर्ट में इस समस्या के समाधान के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख किया गया है। सीबीएसई ने स्कूलों और स्कूल बसों में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा मंत्रालय का प्रज्ञात ढांचा डिजिटल शिक्षा की योजना बनाते समय स्क्रीन टाइम पर ध्यान देने का मार्गदर्शन करता है। वहीं, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्क्रीन टाइम की सीमाओं और ऑनलाइन सुरक्षा के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए है।।
बरेली से कपिल यादव
